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पेरिस जलवायु समझौते में ‘लौट सकता है’ अमेरिका

वाशिंगटन. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका संभवत: पेरिस समझौते में बना रह सकता है. ट्रम्प ने नॉर्वे की प्रधानमंत्री एरना सोलबर्ग के साथ बैठक के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा,“स्पष्ट कहूँ तो, यह एक समझौता है, जिससे मुझे कोई समस्या नहीं है. लेकिन मुझे समस्या उस समझौते पर है, जिस पर उन्होंने हस्ताक्षर किए हैं, क्योंकि उन्होंने हमेशा की तरह एक खराब सौदा किया है.” दरअसल ट्रम्प का इशारा अपने पूर्ववर्ती बराक ओबामा प्रशासन की ओर था जिसके द्वारा 2015 में पेरिस में विश्व के अधिकांश देशों के साथ वैश्विक जलवायु समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे. कानूनी रूप से अमेरिका हालांकि 2020 तक इस संधि को नहीं छोड़ सकता है. ट्रम्प ने पिछले साल जून में कहा था कि अगर संधि पर फिर से बातचीत की जाती है तो अमेरिका इसमें रह सकता है. उन्होंने कहा,“हम संभवत: इस समझौते में लौट सकते हैं.” फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने गत वर्ष दिसंबर में आशा व्यक्त की कि अमेरिका फिर से समझौते में शामिल हो जाएगा. ट्रम्प ने समझौते पर टिप्पणी करते हुए कहा ,“यह हमारी परिसंपत्ति मूल्यों का बड़ा हिस्सा ले लिया. हम गैस, कोयला और तेल तथा कई अन्य चीजों के मामले में अमीर देश हैं, जिनके उपयोग पर भारी जुर्माना किया गया है.” विशेषज्ञों का कहना है कि पेरिस समझौते में विशिष्ट प्रकार के ईंधनों पर प्रतिबंध लगाने के अलावा कुछ और नहीं है और ना ही कोई जुर्माना निर्धारित किया गया है.

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