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म्यांमार सेना ने पकड़े गये 10 रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या की

यंगून. म्यांमार की सेना ने कहा है कि उसके सैनिकों ने गत सितंबर में रखाइन प्रांत की राजधानी सितवे से 50 किलोमीटर उत्तर में पकड़े गये 10 रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या कर दी थी. बौद्ध ग्रामीणों ने इन रोहिंग्या लोगों को उन्हीं के द्वारा खोदी गई कब्र में बंद कर दिया था. सेना ने कल जारी बयान में कहा कि ग्रामीणों और सुरक्षा कर्मियों ने ये हत्याएं करने की बात कबूल कर ली है. यह म्यांमार सेना द्वारा रखाइन में गत सितम्बर में की गई दमनकारी कार्रवाइयों के बारे में दुर्लभ स्वीकारोक्ति है. सेना ने कहा कि उसकी जांच में पाया गया कि सुरक्षा कर्मियों ने 10 लोगों की हत्या की हैै और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. सेना के सीनियर जनरल मिन आंग हलाइंग के फेसबुक पर पोस्ट किये गये बयान के अनुसार, “सुरक्षा बलों ने एक सितंबर को एक इलाके में इन लोगों को सफाया करने की कार्रवाई शुरू की थी, जहां 200 रोहिंग्या लोगों ने डंडों और तलवारों से हमला किया था.” फेसबुक बयान के अनुसार सुरक्षा बलों ने हवा में गोलियां चलाकर खदेड़ने के बाद इन रोहिंग्या लोगों को पकड़ा था. प्रक्रिया के अनुसार इनको आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस के हवाले किया जाना चाहिए था, लेकिन ये लोग लगातार हमलों को अंजाम दे रहे थे और इन्होंने सेना के दो वाहनों को भी विस्फोटकों से उड़ा दिया था. बयान के अनुसार, ऐसे में इन 10 लोगों को पुलिस के हवाले करने की कोई सूरत नहीं बची थी. इसलिए उनको मार डालने की निर्णय लिया गया.” सेना ने कहा कि रखाइन प्रांत में अपने सगे-संबंधियों की गंवा चुके गुस्साय बौद्ध ग्रामीण पकड़े गये रोहिंग्या को जान से मारने पर उतारू थे. ग्रामीणों ने रोहिंग्या को चाकू-छुरे घोंपकर क्रब में धकेल दिया था. इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने रोहिंग्या लोगों पर गोलियां चलायी. सेना ने कहा, “दोषी ग्रामीणों और सुरक्षा बल के जवानों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.” साथ ही उनके लोगों खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने इस घटना की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी. सेना ने 18 दिसंबर को रखाइन प्रांत की राजधानी सितवे से 50 किलोमीटर उत्तर में तटीय गांव इन्न दीन से कब्र से 10 शव बरामद होने की घोषणा की थी. सेना में एक वरिष्ठ अधिकारी को जांच के लिए नियुक्त किया था. गौरतलब है कि सेना ने 25 अगस्त को सेना पर किये गये हमले के जवाब में साढ़े छह लाख रोहिंग्या मुसलमानों देश से निकाल बाहर करने का काम शुरू कर दिया था. सयुंक्त राष्ट्र ने सेना की दमनकारी कार्रवाई की कड़ी निंदा की थी. म्यांमार सेना का कहना था वह केवल वैध आतंकवाद विरोधी कार्रवाई कर रही है.

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