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अंबेडकर अस्पताल में 12 घंटे में 4 बच्चों की मौत, परिजनों का हंगामा

रायपुर.  अंबेडकर अस्पताल में 14 साल के मोसीन की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा मचाया. परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर आरोप लगाते हुए कहा कि बच्चे के लाश की बोली डॉक्टरों ने डेढ़ लाख रुपए आंकी और कहा कि वे मीडिया को न बुलाएं. उत्तरप्रदेश से राजिम अपने परिजनों के घर आए 14 साल के मोसीन खान को अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू में 5 दिन पहले उल्टी-दस्त की शिकायत पर भर्ती किया गया था. परिजनों के मुताबिक अस्पताल में मरीज का इलाज छोड़कर डॉक्टर दिनभर गप्पें लड़ाते रहते हैं. परिजनों ने डॉक्टरों पर यह भी आरोप लगाए कि अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से 7 मरीजों की मौतें हो गई. हालांकि अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक जिस वार्ड में मरीज भर्ती था, वहां किसी भी बच्चे की मौत नहीं हुई. 3 बच्चों की मौत जरूर हुई है लेकिन वे एनआईसीयू वार्ड में भर्ती थे.
नहीं कराया पोस्टमार्टम
परिजनों ने बच्चे की मौत के बाद 2 घंटे से अधिक अस्पताल परिसर और वार्ड में डॉक्टरों पर अभद्र टिप्पणी करते हुए कई आरोप तो लगाए लेकिन जब अस्पताल प्रबंधन द्वारा मौत के संबंध में डॉक्टरों की लापरवाही की पुष्टि करने पोस्टमार्टम कराने की बात कही तो परिजनों ने इससे इंकार कर दिया. वहीं बिना जांच रिपोर्ट और अस्पताल में बनी फाइल के बिना लाश न ले जाने को लेकर भी वार्ड में खूब हंगामा हुआ. हालांकि कुछ घंटों बाद पुलिस की समझाइश के बाद मरीज की लाश ले जाने परिजन राजी हुए.
अस्पताल प्रबंधन ने बताया, इसलिए हुई मौत
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक निजी चिकित्सालय से गंभीर स्थिति में बेबी लीना सोनी को अस्पताल लाया गया था. निजी अस्पताल में 15 दिन भर्ती रहने के बाद बेबी की स्थिति गंभीर हो गई, तब उसे रिफर किया गया. बच्ची का वजन कम होने के साथ-साथ उसे सेप्सिस एवं शॉक की समस्या थी, जिसकी वजह से उसकी मौत हुई. वहीं 1 महीने की बेबी भव्या राजनांदगांव के जिला चिकित्सालय से सीवियर निमोनिया तथा सस्पेक्टेड कंजनाइटल हार्ट डिजीज की शिकायत के साथ चिकित्सालय में भर्ती हुई थी. मरीज की स्थिति गंभीर होने के कारण उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था. बेबी भव्या 9 जनवरी को भर्ती हुई थी और दूसरे दिन दोपहर 2.30 बजे बच्ची की मृत्यु हो गई. इसके अलावा 1 वर्षीय बच्ची वेदकुमारी पिता प्रेमलाल को 10 जनवरी को रात 9.40 बजे महासमुंद से गेस्पिंग की स्थिति में आई थी. मरीज मेंनिग्जाइटिस होने के कारण चिकित्सालय में पहुंचने से पहले ही अत्यंत गंभीर थी.

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