पेट्रोलियम पदार्थ और रियल एस्टेट हो GST में शामिल | Navabharat - Hindi News Website
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पेट्रोलियम पदार्थ और रियल एस्टेट हो GST में शामिल

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों से आम आदमी को हो रही परेशानी पर चिंता जाहिर करते हुए आज कहा कि कांग्रेस शासन वाले राज्यों के वित्त मंत्री वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) परिषद की गुरुवार को यहां होने वाली 24वीं बैठक में पेट्रोलियम पदार्थों और रियल एस्टेट को शामिल करने की पार्टी की मांग दोहराएंगे. पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने यहां कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि पार्टी ने पेट्रोलियम पदार्थों और रियल एस्टेट को जीएसटी में शामिल करने की पहले भी मांग की थी और कल होने वाली बैठक में उसके शासन वाले राज्यों के वित्त मंत्री फिर इसी मांग को रखेंगे. पार्टी लगातार सरकार को जीएसटी में सुधार के लिए सुझाव देती रही है और उसके कई सुझावों पर अमल भी हुआ है लेेकिन इस बार देश में तेल की कीमतें रिकार्ड स्तर पर पहुंच गयी है. आम नागरिकों पर इसका बड़ा बोझ पड़ रहा है और उन्हें इससे तब ही राहत मिलेगी जब पेट्रोलियम पदार्थों को सरकार जीएसटी के दायरे में लाए. उन्होंने कहा कि जीएसटी दुनिया के 160 से ज्यादा देशों में लागू है लेकिन मोदी सरकार ने जो जीएसटी क्रियान्वित किया वह अत्यंत जटिल है जिसके कारण सकल घरेलू उत्पाद(जीडीपी) की दर गिर रही है, कर संग्रहण एवं राजस्व घट गया है और महंगाई की दर में तेजी आ गयी है. बादल ने इन सबकी वजह जीएसटी के गलत क्रियान्वयन को बताया और कहा कि मोदी सरकार ने जीएसटी को लागू करने में जल्दबाजी की जिसके कारण देश का कर ढांचा चरमरा गया है. पूरा जीएसटी जटिल बन गया है और कम समय में इसमें कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. इस बार भी मिनरल वाटर सहित कई वस्तुओं पर जीएसटी दर कम करने का प्रस्ताव है. बादल ने कहा कि कांग्रेस जीएसटी के पक्ष में रही है, लेकिन मोदी सरकार ने जिसे खामियों से भरा जीएसटी बना दिया है, जिसके कारण जुलाई का कर अब तक नहीं भरा जा सका है. कांग्रेस इन खामियों को शुरू से ही गिनाती रही है लेकिन सरकार ने उन कमियों पर बहुत तत्परता नहीं दिखायी जिसका खामियाजा देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू करने से देश की अर्थव्यवस्था को जो फायदा होना चाहिए था मोदी सरकार द्वारा इसे लागू करने को लेकर की गयी जल्दबाजी के कारण वह सुनहरा मौका हमने गंवा दिया है. इसका स्वरूप कैसा हो इस बारे में सरकार ने किसी से कोई सलाह मशविरा ही नहीं किया और इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जीएसटी में बड़ी खामियां रह गयीं. कांग्रेस नेता ने कहा कि जीएसटी की जटिलता को इसी से समझा जा सकता है कि इसकी हर बैठक में कम से कम दो सौ पेज का एजेंडा होता है. गुरुवार को यहां होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक के लिए भी 350 पेज का एजेंडा रखा गया है. इतना बड़ा एजेंडा पूरा पढ़ने का कई बार समय नहीं मिल पाता है इसलिए कमियों को दूर करने में और ज्यादा दिक्कत आती है. उन्होंने कहा कि जीएसटी के प्रति लोगों का रुझान नकारात्मक है. गुरुवार की बैठक में ईवे बिल पर चर्चा होनी है. उन्होंने कहा कि इसमें जो भी बदलाव किए जा रहे हैं सरकार को अब भी उसमें जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और जरूरी संशोधन के लिए समय दिया जाना चाहिए.

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