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हरिद्वार अर्द्ध कुम्भ की तैयारियों की समीक्षा

देहरादून. उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज यहां 2012 में होने वाले हरिद्वार अर्द्ध कुम्भ मेला की तैयारियों की समीक्षा की. रावत ने यहां एक बैठक में अधिकारियों को स्थायी प्रकृति के कार्यों को शीघ्र चिन्हित करने के निर्देश दिये. उन्होंने कहा कि जो काम पूरे हो सकते हो वही शुरू किये जायें. आधे-अधूरे कार्य स्वीकार नहीं किये जायेंगे. कुंभ प्रारम्भ होने के उपरांत कोई भी काम निर्माणाधीन न रहे. मुख्यमंत्री ने हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण को मेला की आवश्यकतानुसार विभिन्न स्थानों को शीघ्र चिन्हीकरण करने के निर्देश दिये. उन्होंने अर्द्धकुम्भ 2021 का लोगो डिजाइन कर कुंभ की समाप्ति तक प्रत्येक सरकारी क्रिया-कलाप में उसका उपयोग करने के निर्देश दिये. मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग के आला अधिकारियों को कहा कि कुंभ मेले में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते है ऐसे में भीड़ प्रबन्धन और सुरक्षा व्यवस्था पहली प्राथमिकता है. बैठक में पुलिस महानिदेशक ए.के.रतूड़ी ने बताया कि कुंभ मेले में 20 हजार से अधिक सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जायेगी. पुलिस विभाग द्वारा कुंभ मेले लिये 54 करोड़ रूपये के स्थायी निर्माण, 30 करोड़ रूपये के सुरक्षा उपकरण आदि संसाधन तथा 45 करोड़ रूपये के बजट का आकलन किया गया है. नगर विकास मंत्री मदन कौशिक ने बैठक में बताया कराया कि अखाडों के लिये बिजनौर रोड पर स्थान चिन्हित कर उनके लिये सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जायेंगी. विगत दिनों प्रथम चरण की बैठक में इसके लिये अखाड़ों की सैद्धांतिक सहमति प्राप्त हो गई है. उन्होंने अखाड़ों की सुविधा और उनके स्नान के दिनों की आवश्यकता के अनुसार योजना बनाने के निर्देश दिये. बैठक में बताया गया कि 2021 कुंभ के लिये कुल 2200 करोड़ के कार्य प्रस्तावित किये जा रहे हैं जिससे 85 प्रतिशत कार्य स्थायी प्रकृति के हैं. संपूर्ण मेला क्षेत्र लगभग 130 वर्ग किमी है. हरिद्वार, देहरादून, टिहरी और पौड़ी जनपदों के भू-भाग मेला क्षेत्र में आयेंगे. फिलहाल मेला क्षेत्र कुल 32 सेक्टर्स में विभाजित है. वर्ष 2010 के कुंभ पर 600 करोड़ रूपये व्यय हुए थे.

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