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पत्रकारिता में विश्वसनीयता सबसे जरूरी : CM रमन

रायपुर. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि पत्रकारिता में विश्वसनीयता सबसे जरूरी बताते हुए इलेक्ट्रानिक मीडिया का उल्लेख किए बगैर चिल्लाने की प्रवृति पर कटाछ करते हुए कहा कि चिल्लाने से नहीं शालीनता से ही पत्रकारिता होती है. डॉ.सिंह आज यहां कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं के प्रशिक्षण के लिए एफ.एम. सामुदायिक रेडियो स्टेशन और टेलीविजन कार्यक्रम निर्माण स्टूडियो का लोकार्पण के अवसर पर इस आशय के विचार व्यक्त किए.उन्होंने इस नये रेडियो स्टेशन और टेलीविजन स्टूडियो को अपना साक्षात्कार भी दिया,जिसका सीधा प्रसारण भी किया गया. उन्होने कहा कि सोशल मीडिया का भी प्रभाव बढ़ रहा है.ऐसे समय में प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया दोनों पर अपनी खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी है. मुख्यमंत्री के रेडियो इंटरव्यू का तत्काल लाइव प्रसारण भी किया गया. यह सामुदायिक एफ.एम. रेडियो स्टेशन 90.8 फ्रिक्वेंसी पर विश्वविद्यालय के दोनों तरफ बीस-बीस किलोमीटर के दायरे में सुना जा सकेगा. छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होने कहा कि आज से 118 वर्ष पूर्व सन् 1900 में माधव राव सप्रे पेण्ड्रा से छत्तीसगढ़ मित्र का प्रकाशन प्रारंभ किया था. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस विश्वविद्यालय की नींव रखी थी. इस विश्वविद्यालय से कुशभाऊ ठाकरे जैसी विभूति का नाम जुड़ा हुआ है. आने वाले समय में इस विश्वविद्यालय की पहचान बनाने की जवाबदारी यहां से निकले विद्यार्थियों की है. डा.सिंह ने कहा कि पत्रकारिता में विश्वसनीयता सबसे महत्वपूर्ण है. पत्रकारिता में आगे बढ़ने के काफी अवसर है. उन्होंने कहा कि तथ्यपरक खबरों और तर्कसंगत तरीके से अपनी बात रखने पर ही किसी पत्रकार की विश्वसनीयता बनती है. पत्रकार को अध्ययनशील होना चाहिए. पत्रकारिता के विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ के इतिहास, भूगोल की पूरी जानकारी हो, छत्तीसगढ़ के साहित्य, संस्कृति, राजनीति, वर्तमान घटनाक्रम की भी पूरी जानकारी होनी चाहिए और शालीनता के साथ अपनी बात रखना चाहिए. उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि आज के बदलते परिवेश और सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रयोग से सूचनाओं की बाढ़ आ गई है. इन सूचनाओं की विश्वसनीयता को परखने की जिम्मेदारी पत्रकारिता से जुड़े लोगों की है. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. मानसिंह परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय में अब विद्यार्थियों को टेलीविजन प्रोडक्शन, एंकरिंग, इटरव्यू, डॉक्यूमेंट्री तैयार करने के तकनीकी पहलुओं का व्यवहारिक प्रशिक्षण मिल सकेगा. रेडियो संवाद के प्रारंभ होने से इस क्षेत्र का भी व्यवहारिक प्रशिक्षण विद्यार्थियों को मिलेगा. उन्होंने कहा आने वाले समय में विश्वविद्यालय से एक दैनिक समाचार पत्र का प्रकाशन प्रारंभ करने की योजना है, जिससे विद्यार्थियों को प्रिंट मीडिया का भी व्यावहारिक अनुभव मिल सके.उन्होंने बताया कि भारतीय जनसंचार संस्थान विश्वविद्यालय से निकले छात्रों के प्लेसमेंट में मदद कर रहा है. इस संस्थान के साथ फेकल्टी और छात्रों के एक्सचेंज का कार्यक्रम भी भविष्य में संचालित किया जाएगा.

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