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ओबोर पर चीन भारत के साथ चलने का इच्छुक

नयी दिल्ली. भारत ने चीन को आज स्पष्ट किया कि वह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के कारण अपनी संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता के उल्लंघन को लेकर सैद्धांतिक रुख से पीछे नहीं हटेगा लेकिन यदि उसकी चिंताओं के समाधान के लिये कोई प्रयास करता है तो भारत उसमें सहयोग करने को तैयार है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने यहां नियमित ब्रीफिंग में एक सवाल के जवाब में यह बात स्पष्ट की. चीनी विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मनीला में आसियान और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलनों के दरम्यान होने वाली संभावित मुलाकात के पहले के एक बयान में संकेत दिये हैं कि भारत ओबोर को लेकर सकारात्मक रुख अपना रहा है. इस बारे में एक सवाल के जवाब में कुमार ने कहा कि मनीला में दोनों नेताओं के बीच क्या बात होगी, यह वह नहीं कह सकते लेकिन ओबोर को लेकर भारत का रुख बहुत स्पष्ट, सिंद्धात आधारित और सतत है. उन्होंने कहा, “जहां तक तथाकथित सीपीईसी का सवाल है, सबको पता है कि यह हमारी संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता का उल्लंघन करती है.” उन्होंने कहा कि भारत ऐसे प्रयासों में हमेशा सहयोग को तैयार हैं जो भारत की जायज़ चिंताओं का समाधान करें. प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता के सवाल पर किसी भी तरह से कोई समझौता संभव नहीं है. इस बारे में चीन को ही कोई रास्ता तलाशना होगा.

देश में बाहरी धन कानून के अनुसार ही आएगा -सरकार
मज़हबी कट्टरता से निपटने के उद्देश्य से अमेरिका द्वारा भारतीय स्वैच्छिक संगठनों को धन दिये जाने की रिपोर्टों पर भारत ने आज सतर्क प्रतिक्रिया दी और कहा कि देश में कोई भी धन कानून के अनुसार ही आ सकता है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने यहां नियमित ब्रीफिंग में इस बारे में पूछे गये सवालों के जवाब में कहा कि उन्होंने इस बारे में मीडिया रिपोर्टों को देखा है और इस बारे में तथ्यात्मक एवं विस्तृत जानकारी मांगी है. इस समय वह इतना ही कह सकते हैं कि उन्हें देश के कानून का पालन करना होगा. ऐसी रिपोर्टें आयीं हैं कि अमेरिकी संगठन भारत में धार्मिक कट्टरता के खिलाफ काम करने के लिये कुछ भारतीय एनजीओ काे बड़ी धनराशि मुहैया कराएंगे.

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