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अध्यात्म की शक्ति जागृत होने से विश्व गुरू बनेगा भारत

रायपुर. मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वाधान में राजिम कुंभ मेला क्षेत्र में आयोजित दो दिवसीय सद्भावना सत्संग समारोह में विषाल जनसमूह को संबोधित करते हुए पूज्य सतपाल जी महाराज ने कहा कि एक गरीब से गरीब आदमी भी चाहता है कि मेरे परिवार में सद्भावना हो, अधिकारी भी चाहते है कि हमारे क्षेत्र के अंदर सद्भावना हो. बड़े-बड़े नेता भी चाहते है कि हमारे देष में, हमारे प्रदेष में सद्भावना हो. सद्भावना राष्ट्रीय एकता के लिए आवष्यक है, परंतु आध्यात्म के बिना सद्भावना एवं राष्ट्रीय एकता संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि अध्यात्म की शक्ति आपार और अपरिमित है. आज हमने अध्यात्म की शक्ति को भुला दिया है. हमें अध्यात्म की शक्ति को जागृत करना होगा. जब अध्यात्म की शक्ति जागृत होगी तब हमारा भारत विश्व गुरू बनेगा. महाराज ने कहा कि हमारे ऋषियों की विश्व कल्याणकारी भावना रही है. ऋषियों की विश्वात्मा प्रभु से यही प्रार्थना रही है कि हे परमात्मन! संसार में सभी सुखी हों, संसार में सबका कल्याण हो. विश्व कल्याण की भावना केवल अध्यात्म में ही सन्निहित है. जो लोग अध्यात्मवादी नहीं होते वे केवल अपनी जाति, बिरादरी की बातें करते है कि केवल हम ही आगे बढ़ें और बाकी सब पीछे रह जाएँ. परन्तु हमारे संतों ने आत्मा की ही आवाज सुनी और केवल आत्मा का ही विकास किया. उन्होंने सारे जगत के लोगों के कल्याण की बात की. भारत देश सारे जगत के कल्याण की बात करता है, जो सारे जगत के कल्याण की बात करता है, वही विश्व गुरू बन सकता है. वही आध्यात्म की बात भी कर सकता है. महाराज जी ने कहा कि सनातन धर्म जिसे मानव धर्म भी कहा है वह तब से है जब से मानव संसार में है, जो आदमी अपने आपको जानना चाहता है, अपने अंदर उस छिपी हुई शक्ति को जानना चाहता है, वही वास्तव में सच्चा धर्म है. यह जानने का प्रयास कि मेरे से बढ़कर कोई ताकत, कोई शक्ति भी है, जो संसार को रच रही है. महाराज जी ने कहा कि धर्म को कैसे जानें ? आदि गुरू शंकराचार्य जी समझाते है कि दुख का कारण है अज्ञानता, और अज्ञानता का तोड़ है ज्ञान. ज्ञान को अगर आप नहीं जानते है, यही अज्ञान है. महान पुरूष समझाते है कि आपके अंदर जो अज्ञानता है उस अज्ञानता को दूर करने के लिए अपने वास्तविक स्वरूप का ज्ञान प्राप्त करो. जिसे अध्यात्म ज्ञान कहा है, जिसे अध्यात्म विद्या कहा है जो सभी विद्याओं का राजा है. इस अवसर पर धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि इसी सद्भावना के उद्देश्य से राजिम कुंभ का शुभारंभ किया है. सनातम धर्म के श्रेष्टता को जानने ऐसे आयोजन करते है. प्रदेश के लोग धर्मप्रेमी है. यहां के लोग धर्म के प्रति अच्छा आचरण रखते हैं. इस अवसर पर बाल कलाकारों ने अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुन्दर प्रस्तुति से सबको आनन्दित किया. भजन गायक कलाकारों ने अपने सुमधुर भजनों का गायन कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया. महात्मा हरि सन्तोषानन्द ने मंच का संचालन किया. समारोह से पूर्व आज प्रातः 10 से दोपहर 12 बजे तक राजिम कंुभ मेला क्षेत्र में परम पूज्य सतपाल जी महाराज की भव्य शोभायात्रा निकाली गई. इस यात्रा में हजारों श्रद्धालु लोग नाचते, गाते, ढोल, ढमाका बजाते छत्तीसगढ़ के विभिन्न झांकियों एवं नृत्यों को प्रस्तुत करते हुए भारत के सभी संत-महापुरूषों के चित्रों को हाथों में लिए हुए चल रहे थे. यह शोभायात्रा राजिम कुंभ कल्प में सबसे विशाल भव्य एवं अद्भुत यात्रा थी.

धर्मस्व मंत्री अग्रवाल ने किया राजिम कुंभ पर केन्द्रित फोटो पुस्तिका का विमोचन
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने राजिम के त्रिवेणी संगम पर बने भव्य मुक्ताकाशी मंच पर दीपक टंडन द्वारा राजिम कुंभ (कल्प) पर प्रकाशित फोटो पुस्तिका का विमोचन किया. पुस्तिका में राजिम कुंभ के इतिहास, संत-समागम, पंचकोशी परिक्रमा तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर केन्द्रित आकर्षक फोटोग्राफ्स प्रकाशित किए गए हैं. इस बहुरंगीय पुस्तिका में फोटो के माध्यम से राजिम कुंभ की महिमा का बखान भी किया गया है. धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने फोटो पुस्तिका के प्रकाशन पर सम्पादक दीपक टंडन को बधाई और शुभकामनाएं दी.

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