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विज्ञान में हम किसी से कम नहीं : हर्षवर्द्धन

नयी दिल्ली. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने आज कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में भारत किसी से कम नहीं है और यह लगातार सुधार करता हुआ शीर्ष पर पहुँचेगा. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के लिए किये गये बजट प्रावधानों पर संवाददाताओं के साथ यहाँ चर्चा के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में डॉ. हर्षवर्द्धन ने कहा “हम विज्ञान के नाम पर अमेरिका वगैरह को ऐसा समझते हैं कि पता नहीं वे क्या कर रहे हैं. हम किसी से कम नहीं हैं. हम लगातार सुधार कर रहे हैं. आप निश्चिंत रहिये कि हम नबंर एक पर पहुँचेंगे.” उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अनुसंधान में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में भारत दुनिया का तीसरा-चौथा पसंदीदा देश बन चुका है. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत आने वाले वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सीएसआईआर) सिमागो की सरकार द्वारा वित्त पोषित दुनिया भर की 1,207 प्रयोगशालाओं में नवें स्थान पर पहुँच गया है जबकि सरकार से सहायता प्राप्त और निजी प्रयोगशालाओं में यह 75वें स्थान पर है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विज्ञान के साथ उद्योग को जोड़ने और अनुसंधानों के फायदे आम लोगों तक पहुँचाने के लिए अगले वित्त वर्ष में 15 जैव प्रौद्योगिकी इंक्यूबेटर तथा 15 से 20 स्टार्टअप इंक्यूबेटर शुरू करने की योजना है. जैव प्रौद्योगिकी विभाग की इकाई बीआईआरएसी ने 3000 से ज्यादा स्टार्टअप को वित्तीय सहायता देने का लक्ष्य रखा है. डॉ. हर्षवर्द्धन ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति सरकार की निष्ठा एवं प्रतिबद्धता मजबूत है. यदि केंद्रीकृत प्रयास किये जायें तो प्रौद्योगिकी के माध्यम से देश की बहुत सारी समस्याएँ सुलझ सकती हैं. उन्होंने कहा कि बजट में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के लिए 12,322.62 करोड़ रुपये तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के लिए 1,800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के लिए बजट आवंटन आठ प्रतिशत, सीएसआईआर के लिए 3.56 प्रतिशत, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के लिए 6.7 प्रतिशत तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के लिए 12.7 प्रतिशत बढ़ाया गया है.
मोदी सरकार ने अब तक पाँच बजट पेश किये हैं और इन पाँच साल के दौरान हुये आवंटन की उससे पहले के पाँच साल से तुलना करते हुये डॉ. हर्षवर्द्धन ने कहा कि मौजूदा सरकार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर काफी ध्यान दे रही है. उन्होंने बताया कि इन पाँच साल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का बजट कुल 19,764 करोड़ रुपये रहा है और इस प्रकार इसमें 90 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसी प्रकार पाँच साल में सीएसआईआर का बजट 43 प्रतिशत, जैव प्रौद्योगिकी विभाग का 65 प्रतिशत और पृथ्वी विज्ञान विभाग का 26 प्रतिशत बढ़ा है. केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि विज्ञान के समाधानों को आम जनता तक पहुँचाने का काम सही से नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि इसके लिए उद्योगों का सहयोग भी अपेक्षित है. सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आधे प्रतिशत से भी कम अनुसंधान एवं विकास पर खर्च किये जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस मामले में हम विकसित देशों की नकल नहीं कर सकते क्योंकि हमारे देश की जरूरतें अलग हैं. अनुसंधान एवं विकास पर सरकारी खर्च जीडीपी के 0.4 से 0.5 प्रतिशत है और निजी क्षेत्र के निवेश से अनुसंधान एवं विकास में तेजी की उम्मीद है.

‘एक्सलरेट विज्ञान’ से मशीनों का इस्तेमाल सीखेंगे वैज्ञानिक
वैज्ञानिकों, अनुसंधानकर्ताओं तथा पीएचडी छात्रों को विभिन्न उन्नत मशीनों के इस्तेमाल में दक्ष बनाने के लिए सरकार जल्द ही ‘एक्सलरेट विज्ञान’ नाम से एक कार्यक्रम शुरू करने वाली है.विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सचिव आशुतोष शर्मा ने यहाँ एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि ‘एक्सलरेट विज्ञान’ के तहत हर साल 200 कार्यशालाएँ एवं प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जायेगा. इन शिविरों में वैज्ञानिकों एवं अनुसंधानकर्ताओं के साथ पीएचडी छात्रों को भी मशीनों के इस्तेमाल की जानकारी दी जायेगी. इस कार्यक्रम की शुरुआत आगामी वित्त वर्ष में होगी. शर्मा ने बताया कि इसके अलावा देश की विभिन्न प्रयोगशालाओं में उपलब्ध मशीनों के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल एवं उपलब्धता के लिए एक पोर्टल भी बनाया जायेगा. इस पोर्टल पर वैज्ञानिक यह देख सकेंंगे कि किसी प्रयोगशाला की कौन सी मशीन कब उपलब्ध होगी. इससे यदि किसी एक प्रयोगशाला में कोई मशीन है तो उसका लाभ दूसरी प्रयोगशाला के वैज्ञानिक भी उठा सकेंगे. उपलब्धता के साथ इस पोर्टल पर मशीनों के रखरखाव और उनके इस्तेमाल के तरीकों के बारे में भी जानकारी दर जाएगी. इस्तेमाल के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण मिल जाने से मशीन के इस्तेमाल के दौरान वैज्ञानिक ज्यादा सहज महसूस कर सकेंगे.

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