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निर्यात में पाँच फीसदी हिस्सेदारी के लिए 26 प्रतिशत वृद्धि की दरकार : रिपोर्ट

नयी दिल्ली. वैश्विक निर्यात में पाँच प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के लिए लगातार पाँच साल तक देश का निर्यात 26 प्रतिशत की दर से बढ़ाने की जरूरत है. विश्लेषण एवं सलाह कंपनी ‘दून एंड ब्रैडस्ट्रीट’ की एक रिपोर्ट में यह बात कही गयी है. कंपनी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु से मुलाकात कर उन्हें यह रिपोर्ट सौंपी. इसमें कहा गया है कि निर्यात बढ़ाने के लिए भारतीय उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनुकूल प्रतिस्पर्द्धी बनाना होगा. इसके लिए बुनियादी ढाँचों में भी सुधार की जरूरत है जिसमें बंदरगाह प्रमुख हैं. अध्ययन में महत्त्वपूर्ण मुद्दों एवं चुनौतियों का उल्लेख किया गया है. इसमें बंदरगाह क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नीतिगत स्तर पर 60 उपाय सुझाये गये हैं. देश का अधिकतर वस्तु व्यापार बंदरगाहों के माध्यम से ही होता है. रिपोर्ट में ‘बंदरगाह प्रदर्शन सूचकांक’ भी जारी किया गया है. इससे बंदरगाहों के प्रदर्शन को आँकने में मदद मिलेगी. देश के कुल सामुद्रिक व्यापार का 67 प्रतिशत बोझ उठाने वाले 13 प्रमुख बंदरगाहों के अधिकारियों, सरकारी अधिकारियों, व्यापार संगठनों, आयातकों/निर्यातकों, कार्गो एजेंटों समेत कुल 700 प्रतिनिधियों को शामिल करते हुये सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार की गयी है. इसमें सिर्फ कंटेनरों और बड़े कार्गो के आँकड़ों को शामिल किया गया है. तेरह बंदरगाहों में से जेएनपीटी, कमाराजार और वाइजैग को ‘अच्छा’ स्कोर दिया गया है. कोच्चि, कांडला, पारादीप, चेन्नई, मुर्मुगाँव, न्यू मेंगलूर और वीओसी को ‘औसत’ तथा हल्दिया, कोलकाता और एमबीपीटी को ‘खराब’ स्कोर दिया गया है. रिपोर्ट में बंदरगाह पर ज्यादा बोझ, कस्टम मंजूरी, शिपिंग लाइन से जुड़े मुद्दे एवं शुल्क, कागजी प्रक्रिया तथा नियामक मंजूरियों को सबसे आम समस्या बताया गया है.

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