माघ मेला के अन्तिम स्नान पर्व पर संगम तट पर आस्थाओं के ‘निशान’ का सैलाब | Navabharat - Hindi News Website
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माघ मेला के अन्तिम स्नान पर्व पर संगम तट पर आस्थाओं के ‘निशान’ का सैलाब

इलाहाबाद. उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद के प्रयाग में गंगा, युमना और अदृश्य सरस्वती संगम स्थल पर आज माघ मेला के अन्तिम स्नान पर ‘निशान’ के साथ श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. निशान को लेकर सैकड़ों ट्रैक्टर पर इलाहाबाद और आसपास के जिलों से महिला, पुरूष और बच्चे संगम तट पर पहुंचे. ‘मनौती’ पूरी होने पर लोग ध्वज (निशान) चढ़ाते हैं. जिस व्यक्ति के हाथ में निशान होता है घर की महिला उस पर चावल डालती हुई आगे बढ़ती जाती हैं. चावल को अक्षत के रूप में शुद्ध माना जाता है. गाजे-बाजे के साथ महिलायें पीछे-पीछे नाचती हुई गंगा मां के प्रति अपनी आस्था प्रकट करती है. नैनी कोठिया निवासी छोटूराम ने बताया कि उनकी मनौती थी कि बेटा पैदा होने पर वह उसका मुंडन संगम तट पर करायेंगे और निशान चढ़ायेंगे. उन्होंने बताया कि उनका पुत्र दीपक दो साल का हो गया है और आज उसका मुंडन संस्कार कराने के लिए ध्वज निशान के साथ मां गंगा से किया वादा पूरा करने आये हैं. इलाहाबाद के ही बदरी चाका बिलवा निवासी का कहना है कि उसने लम्बे समय गंगा में स्नान करते समय मां गंगा से से वादा किया था कि उसका मकान बन जायेगा तो वह निशान चढ़ायेगा. मकान का दो महीने पहले गृह प्रवेश किया गया है. फूलपुर के धोबियाना मोहल्ले से पहुंचे राजेश धींगर बेटे की नौकरी के लिए मन्नत मांगी थी. उनके पुत्र अरविंद की मिलेट्री में नौकरी लग गयी. श्रद्धालुओं की मनौती पूरी होने के बाद वे यहां मां गंगा से किया गया वादा पूरा करने आते हैं. वे ध्वज निशान को गंगा में डूबो कर अपने वादे को पूरा करते हैं तथा समृद्धि का आर्शीवाद लेते हैंं. गौरतलब है कि मनोवांछित फल प्राप्ति के विश्वास को लेकर गत 15 जनवरी को नेपाल के 600 लोगों का मुरली काफिला माघ मेले में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के तट पर पहुंचा था. यहीं पर सभी ने अपने बाल मुंडवाये थे.

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