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फेफड़े के कैंसर के प्रमुख कारणों में एक धुआं

लखनऊ. यूं तो कैंसर सबसे खतरनाक बीमारी मानी जाती है लेकिन फेफड़े को यदि इसने अपने में ले लिया तो जान बचाना मुश्किल हो जाता है. फेफड़े के कैंसर के प्रमुख कारणों में एक धुआं भी माना जाता है. तीन दशकों में दुनिया में सबसे ज़्यादा मामले फेफड़े के कैंसर के सामने आए हैं. प्रतिवर्ष लगभग 13 लाख कैंसर के नए मरीज दुनिया में पाये जाते हैं. सबसे ज्यादा मृत्यु फेफड़े के कैंसर से होती हैं. आमतौर पर फेफड़े के कैंसर से ग्रस्त मरीज कुछ ही वर्ष तक जीवित रह पाता है. किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के श्वसन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया की फेफड़े के कैंसर का सबसे प्रमुख कारण धूम्रपान है. धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को कैंसर का खतरा 10 प्रतिशत बढ़ जाता है. धुम्रपान के समय साथ में रहने वाले को कैंसर का खतरा रहता है. धूम्रपान करने से 30 प्रतिशत धुंआ व्यक्ति के फेफड़े में चला जाता है बाकी का 70 प्रतिशत धुंआ आस पास के व्यक्ति को प्रभावित करता है या वातावरण में फ़ैल जाता है. डॉ. सूर्यकांत के अनुसार चूल्हे पर खाना बनाने वाली महिलाओं को भी इसका खतरा बना रहता है. उन्हाेंने बताया कि कैंसर रोग से पीड़ित जितनी महिलायें आती है उनमें से आधी के कैंसर का कारण धुआँ ही पाया गया. उन्होंने बताया की धुआँ किसी भी तरह उत्पन हो वह सम्पर्क में आने वाली महिला के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है. डाक्टर सूर्यकांत के अनुसार यदि महिला का पति भी धूम्रपान करता है तो उसका स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है. कैंसर के ऐसे मरीज की उम्र अक्सर 30-40 वर्ष के आसपास होती है. कई वर्षों तक चूल्हे पर खाना बनाने वाली महिलाओं को भी यह हो सकता है. उन्होंने बताया, सरकार के द्वारा चलाई गयी उज्ज्वला योजना का महिलाओं में फेफड़े के कैंसर से बचाने में महत्वपर्ण भूमिका रहेगी. गैस पर काम करने से किसी प्रकार के धुएं से महिलाओं को सामना नहीं करना पड़ता है. इस बार बजट में सरकार ने उज्ज्वला योजना का बजट और भी बढ़ाने की बात कही है. फेफड़े के कैंसर से पीड़ित व्यक्ति में कुछ लक्षण अचानक से पैदा हो जाते हैं. खांसी आने लगती है, खांसी में खून आने लगता है, वजन कम होने लगता है, व्यक्ति दुबला होने लगता है, थकान होने लगती है, भूख नहीं लगती है और व्यक्ति में चिड़चिड़ापन आने लगता है. आवाज़ बदल जाती है अगर ये सभी लक्षण हैं तो जांच करानी चाहिये.

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