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लघु बचत कानून में संशोधन

नयी दिल्ली. सरकार ने छोटी बचत करने वालों विशेषकर बालिका, वरिष्ठ नागरिकों और नियमित बचत करने वालों के हितों को ध्यान में रखते हुये लघु बचत कानूनों में संशोधन करते हुये सरकार बचत प्रमाण पत्र कानून 1959, लाेक भविष्य निधि कानून 1968 और सरकारी बचत बैंक कानून 1873 का विलय किया जायेगा. आधिकारिक जानकारी के अनुसार, लघु बचत स्कीमों को लेकर कई कानून हैं. ‘न्यूनतम सरकार अधिकतम सुशासन’ की अवधारणा के तहत सरकार ने इन तीन कानूनों का विलय करने का प्रस्ताव किया है. उसने कहा कि सरकारी बचत प्रमाण पत्र (एनएससी) कानून 1959 और लोक भविष्य निधि कानून 1968 के प्रावधानों को नये कानून में शामिल किया जायेगा. सरकार का कहना है कि प्रस्तावित सरकारी बचत प्रोत्साहन कानून में पीपीएफ कानून को समाहित करने के दौरान हित निवेशकों के हित संरक्षण को अक्षुण्ण रखा जायेगा. इसके लिए जमाकर्ताओं के किसी लाभ को समाप्त नहीं किया जायेगा बल्कि नया कानून बनाने की मंशा जमाकर्ताओं के लिए कानून को सरल बनाना है. इसके जरिये निवेशकों को छूट भी दी जा सकेगी. सरकार ने कहा कि लोक भविष्य निधि खाते को जब्त करने के संबंध में अक्सर चिंता जतायी जाती रही है, लेकिन यह स्पष्ट किया जाता है कि इस तरह का कोई प्रावधान नहीं किया गया है. वर्तमान और भविष्य के सभी निवेशकों को संशोधित कानून में भी पूरा संरक्षण दिया जायेगा. नये कानून में किये जा रहे प्रावधानों में से कुछ इस प्रकार हैं. यदि जमाकर्ता चाहेगा तो पांच वर्ष पूर्ण होने से पहले भी पीपीएफ खाते को बंद कर सकता है. मौजूदा कानून के अनुसार, कोई भी पीपीएफ खाता पांच वित्त वर्ष पूरा किये बगैर बंद नहीं किया जा सकता है. सभी स्कीमों के लिए अपरिपक्व बंदी की व्यवस्था होगी. अब लघु बचत स्कीमों की अपरिपक्व बंदी के लिए चिकित्सा, उच्च शिक्षा की जरूरतों आदि के लिए शुरू किया जायेगा. अव्यस्कों के लिए अब अभिभावक लघु बचत स्कीम में निवेश कर सकेंगे. इसमें अभिभावक को भी अधिकार और जिम्मेदारियां दिये जाने के प्रावधान है. वर्तमान कानून में अव्यस्कों द्वारा जमा किये जाने के संबंध में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. नये कानून में बच्चों में बचत की भावना जागृत करने के उद्देश्य से यह प्रावधान किया गया है. दिव्यांगों के नाम पर भी खाता शुरू करने के वर्तमान तीनों कानूनों में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है लेकिन नये कानून में इसके लिए भी उपाय किये गये हैं.

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