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कीमत घटने से स्टेंट लगाने वालों की संख्या बढ़ी

नयी दिल्ली. दिल के मरीजों को लगाये जाने वाली स्टेंट की कीमत में कमी आने के बाद न केवल इसे लगाने वाले लोगों की संख्या बढ़ गयी है बल्कि कीमतों को लेकर सरकार और विदेशी कम्पनियों के बीच टकराव भी शुरु हो गया है. रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार के अनुसार देश में करीब छह करोड़ दिल के मरीज हैं और स्टेंट लगाने के लिए साल में लगभग साढे पांच लाख आपरेशन किये जाते हैं. स्टेंट की कीमत में कमी आने के बाद इसे लगाने वालों की संख्या में डेढ़ लाख की वृद्धि हो गयी है और इससे लोगों को कुल मिलाकर करीब पांच से छह हजार करोड़ रुपये का फायदा हुआ है. उन्होंने कहा कि पहले अस्पताल एक स्टेंट की कीमत सबा लाख से ढाई लाख रुपये तक लेते थे जिसके कारण दिल के मरीजों को दस-दस लाख रुपये तक आॅपरेशन का खर्च लगता था. इसकी अधिक शिकायत मिलने पर नेशनल फार्मा प्राइसिंग आथरिटी (एनपीपीए) ने पिछले साल ड्रग एल्युजन स्टेंट की कीमत 31000 रुपये निर्धारित की. करीब 90 प्रतिशत मामलों में यही स्टेंट लगाया जाता है जिसकी कीमत इस माह और कम कर 27000 रुपये कर दी गयी है. रसायन एवं उर्वरक मंत्री के अनुसार एनपीपीए ने वर्ष 2011 में जीवन रक्षक दवाओं और आपरेशन के दौरान लगाये जाने उपकरणों का मूल्य नियंत्रित करना शरु किया था. वर्ष 2014 तक 404 दवा मूल्य नियंत्रण के अधीन थी. मोदी सरकार के आने के बाद 1084 दवाओं और उपकरणों को मूल्य नियंत्रण के अधीन लाया गया. उन्होंने बताया कि प्रारंभ में 127 अस्पतालों ने स्टेंट के मूल्य को लेकर आनाकानी की थी लेकिन उन्हें जब कार्रवाई की चेतावनी दी गयी तो वे रास्ते पर आ गये. कुमार ने कहा कि एक समय तो स्टेंट के आयात को भी कम करने का प्रयास किया गया था. अब फिर आयात कम करने की धमकी दी जा रही है लेकिन जो लोग आयात कर रहें हैं या जो कम्पनी देश में इसका निर्माण कर रही है उन्हें छह माह के दौरान आयात या निर्माण के औसत के अनुरुप इसे उपलब्ध कराना होगा. अब लगभग 60 प्रतिशत स्टेंट का निर्माण देश में ही किया जा रहा है और शेष का आयात किया जाता है. जो अस्पताल स्टेंट लगाने और उपचार का अधिक शुल्क लेते हैं उनसे 18 प्रतिशत ब्याज के साथ वसूली की जा सकती है तथा लाईसेंस को निलम्बित करने के साथ ही उन पर आपराधिक कार्रवाई भी की जा सकती है. उन्होंने बताया कि बुजुर्गो में घुटने की बीमारी की समस्या अधिक होती है और पहली बार घुटना प्रत्यारोपण पर एक लाख 55 हजार रुपये लिए जाते थे. दूसरी बार घुटना प्रत्यारोपण पर यह खर्च आठ लाख रुपये तक हो जाता था. अब घुटना प्रत्यारोपण के लिए 55 हजार रुपये निर्धारित किये गये है.

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