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मासिक धर्म को लेकर सोच में बदलाव की जरूरत : उमा

नयी दिल्ली. केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने कहा है कि देश में स्त्रियों के मासिक धर्म को एक कलंक के रूप में पेश करने की मानसिकता में बदलाव लाने की बेहद जरुरत है. भारती ने आज यहाँ जलांजलि पर एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही. उन्होंने ग्रामीण इलाकाें में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य का जिक्र करते हुए कहा कि गाँव में स्त्रियों के मासिक धर्म को लेकर लोगों की सोच बदलने की जरूरत है क्योंकि लोग इसे एक कलंक के रूप में पेश करते हैं. उन्होंने कहा कि ग्रामीण लड़कियों को इस बारे में खुलकर बातचीत करनी चाहिए और उनके सेनेटरी नैपकिन को सस्ता बनाने की भी जरूरत है ताकि गरीब महिलाएं उसका इस्तेमाल कर सकें. उन्होंने कहा कि मासिक धर्म के बारे में स्कूलों और परिवार में भी बातचीत होनी चाहिए और लोग खुले में इस पर चर्चा कर सकें, इससे संकोच भी टूटेगा. उन्होंने ग्रामीण इलाकों में ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन पर भी जोर देते हुए इसमें महिलाओं की भूमिका को भी रेखांकित किया और उनके कौशल विकास को जरूरी बताया. कार्यशाला को पेयजल एवं स्वच्छता राज्य मंत्री एस एस अहलूवालिया एवं सचिव परमेश्वरन अय्यर ने भी संबोधित किया.

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