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आतंकवाद पर पाकिस्तान की कार्रवाई से ट्रंप संतुष्ट नहीं

वाशिंगटन. अमेरिका ने कहा है कि वह आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यालय के उप प्रेस सचिव राज शाह ने कहा है कि राष्ट्रपति आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं. शाह ने यहां ट्रम्प प्रशासन की दक्षिण एशिया नीति पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, “हमने पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को लेकर स्पष्टता व्यक्त की है. पहली बार हम लोग पाकिस्तान को उसकी कार्रवाइयों के लिए जवाबदेह बना रहे हैं.” उन्होंने पाकिस्तान को अमेरिका की ओर से दी जा रही सहायता में कटौती की चेतावनी देते हुए कहा,“ हम पाकिस्तान को आतंकवादी संगठनों को सुरक्षित पनाहगाह के बारे में अब हम चुप नहीं रह सकते. हम पाकिस्तान को अरबों डॉलर की सहायता राशि दे रहे हैं और वह आतंकवादियों को आश्रय दे रहा है जिसके खिलाफ हम लोग लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा, “ इसे बदलना पड़ेगा और तुरंत बदला जाएगा.”

एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला
पेरिस. काले धन को वैध बनाने पर कड़ी नजर रखने, इससे जुड़े मामलों पर विधायी ,नियामक अौर संचालनात्मक उपाय सुझाने वाली अंतर सरकारी संस्था ‘द फायनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स (एफएटीएफ) ने आतंकवाद को वित्त पोषित करने के लिए आज पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखने का फैसला किया. मीडिया रिपोर्टों में आज यहां यह जानकारी दी गई. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अब आतंकवाद को वित्त पोषित करने के पाकिस्तान के मामले की गहनता से जांच की जाएगी. इस मामले में चीन ने अपना विरोध वापिस लेते हुए कहा कि सर्वसम्मति से इस मामले में फैसला लिया जाना चाहिए. इससे पहले अंतर्राष्ट्रीय सहयोग समीक्षा समूह( आईसीआरजी)की बैठक में इस मामले में कोई भी सहमति नहीं बन सकी थी और पाकिस्तान ने इसे अपनी जीत के तौर पर लिया था. उसके इस दावे पर अमेरिका आैर भारतीय अधिकारियों ने कहा था कि अभी इस तरह का दावा करना जल्दबाजी होगा और अंतिम निर्णय आना बाकी है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा एम आसिफ ने टवीट् करते हुए कहा था कि अंतर्राष्ट्रीय संस्था को विश्वास दिलाने के लिए अभी उसे तीन माह का समय मिल गया है और यह एक तरह से पाकिस्तान की जीत है. काले धन को वैध बनाने के मामले में पाकिस्तान को वर्ष 2012 से 2015 तक इस सूची में रखा गया था. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस प्रस्ताव को अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस ने पेश किया था और आईसीआरजी में लाए गए प्रस्ताव का चीन, तुर्की तथा सऊदी अरब ने समर्थन नहीं किया था.

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