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अयाेध्या में राम मंदिर निर्माण का समाधान शीघ्र हो : दास

अयोध्या. श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष एवं मणिराम दास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा हैै कि अयोध्या में स्थित विवादित श्रीराम जन्मभूमि पर मोदी सरकार भव्य मंदिर निर्माण कराने के लिये शीघ्र समाधान निकाले. दास ने आज यहाँ ‘यूनीवार्ता’ से कहा कि केन्द्र में मोदी सरकार का चार वर्ष बीत जाने के बाद भी अयोध्या में स्थित विवादित श्रीराम जन्मभूमि पर विराजमान रामलला का मंदिर का समाधान न होना हिन्दू समाज को अखर रहा है. उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण में हो रही देरी तथा केन्द्र में मोदी एवं राज्य में योगी सरकार के रहते हुए प्रतीक्षा अब अखरने लगी है. उन्होंने कहा कि अन्य सरकारों के दौरान जिस प्रकार मंदिर जागरण अभियान चला, उसी तरह इस सरकार में भी इस बहुप्रतीक्षित विषय को उठाया जाये ताकि मोदी सरकार शीघ्र इसका समाधान निकाले. उन्होंने कहा कि न्यायालय में यह विवाद सत्तर वर्षों से है. हम सभी लोग न्यायालय और न्यायविदों का सम्मान करते हैं. वह नियमित सुनवाई के प्रति संवेदनशील है लेकिन जागरण और सरकार को ध्यान दिलाना हमारा मौलिक और धार्मिक अधिकार भी है. उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर कारसेवकों ने अस्थाई तौर पर ही सही मंदिर बना दिया. बस उस स्थान को भव्यता देना शेष है जिसकी प्रतीक्षा हिन्दू समाज लगातार अपनी आहुति देकर करता आ रहा है. उन्होंने कहा कि आज श्रीराम जन्मभूमि पर विराजमान रामलला टेंट में देखकर समाज उत्तेजित हो जाता है. दास ने कहा कि समाज स्वयं प्रश्न करता है कि सरकारों के प्रतिनिधि वातानुकूलित बड़े-बड़े भव्य भवनों में आनंद प्राप्त कर रहे हैं और दुनिया को शक्ति देने वाले खुद कपड़े के मंदिर में ठंडी, गर्मी और बरसात का सामना कर रहे हैं साथ ही साथ कैदियों की भाँति पुलिस के अभेद्य तंत्र में जुड़े हुए हैं. श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष ने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद ने संतों को आगे करके इस आंदोलन को विश्व व्यापी बना दिया. हर सरकार में आंदोलन हुआ. गोलियां खायीं. लोग जेलों में बंद हो प्रताड़ित हुए फिर भी संकल्प से नहीं हटे और न ही आगे हटने वाले हैं. उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज को मोदी सरकार के आने से आशा बंधी है, परन्तु कब तक? उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद को चाहिए कि वह शीघ्र ही इस गंभीर विषय पर संत-धर्माचार्यों की एक विशेष बैठक बुलाकर प्रधानमंत्री से मुलाकात का समय तय करे और संत-धर्माचार्य अपनी भावनाओं से उन्हें अवगत करायें. उन्होंने कहा कि न्यायालय का अपना न्यायिक क्षेत्र है. हम सभी का सम्मान करते हैं लेकिन यह कहना है कि न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा करनी चाहिए तो हिन्दू समाज सत्तर वर्षों से कर रहा है. उन्होंने कहा कि सत्य को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती परन्तु आज सत्य रूपी भगवान श्रीरामलला न्यायालय में याची बनकर रह गये हैं. यह सभी के लिये पीड़ादायी है. अब प्रतीक्षा नहीं मंदिर निर्माण होना चाहिये. न्यास अध्यक्ष ने कहा कि संत धर्माचार्य रामजी के नाम पर ही दाल रोटी खा रहे हैं. वह उन्हें कहां छोड़ऩे वाले हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोग मंदिर निर्माण के लिये पुन: एक बलिदान की बात कर रहे हैं जिसका अब कोई औचित्य नहीं है. सरकार चाहे जिसकी हो हिन्दू समाज को उसके आराध्य का मंदिर मिलना चाहिये. उन्होंने कहा मोदी सरकार के चार वर्ष बीत गये. विकास के साथ हम जुड़े हैं परन्तु आस्था को तिलांजलि देकर कदापि नहीं. उन्होंने अयोध्या के सरयू नदी में हो रहे प्रदूषण की चर्चा करते हुए कहा कि योगी सरकार का एक वर्ष व्यतीत हो गया. इसके बावजूद सरयू नदी में प्रदूषण ज्यों का त्यों है. राज्य सरकार ने अभी तक सरयू में गिर रहे गंदे नालों पर रोक नहीं लगायी जिसकी तत्काल आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि सरयू जल का उपयोग मठ-मंदिरों के भोग राग और संत धर्माचार्य के नित्य पान करने में होता है. क्या अब प्रदूषित जल ही संतों को पीना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी और इस सरकार में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तो हिन्दू समाज और अयोध्या के संत-धर्माचार्यों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी कि अब सरयू नदी में प्रदूषण खत्म हो जायेगा और स्वच्छ जल संत धर्माचार्यों को मिलेगा लेकिन एक वर्ष व्यतीत हो जाने के बाद भी ज्यों का त्यों बना हुआ है.

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