Navabharat – Hindi News Website
No Comments 14 Views

आप के 20 विधायकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, चुनाव आयोग का टिप्प्णी से इनकार

नयी दिल्ली. ‘लाभ का पद’ मामले में अयोग्य ठहराये गये आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों को दिल्ली उच्च न्यायालय से आज बड़ी राहत मिली. न्यायालय ने विधायकों की सदस्यता बहाल कर दी है. न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की खंडपीठ ने विधायकों को अयोग्य ठहराये जाने की सिफारिश को चुनाव आयोग की सिफारिशों को खारिज करते हुए निर्देश दिया कि आयोग इनकी याचिका पर फिर से सुनवाई करे. न्यायालय ने गत 28 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था. दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करके कहा, “सत्य की जीत हुई. दिल्ली के लोगों द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों को गलत तरीके से बर्खास्त किया गया था. उच्च न्यायालय ने दिल्ली के लोगों को न्याय दिया, दिल्ली के लोगों की बड़ी जीत, दिल्ली के लोगों को बधाई.” पीठ के फैसला सुनाने के समय बड़ी संख्या में विधायक न्यायालय में मौजूद थे और निर्णय सुनाते ही खुशी से झूम उठे. चुनाव आयोग द्वारा विधायकों को अयोग्य ठहराये जाने के बाद इन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील की थी. इसके बाद न्यायालय ने चुनाव आयोग से कहा था कि इस मामले में निर्णय आने तक उपचुनाव कराने की घोषणा नहीं की जाये. आयोग ने इसी वर्ष 19 जनवरी को संसदीय सचिव को लाभ का पद मानते हुए राष्ट्रपति से आप के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की थी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूर करते हुए विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी थी. दिल्ली विधानसभा के फरवरी 2015 में हुए चुनाव में आप को 70 में से 67 सीटें मिली थीं. अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री बनने के बाद 21 विधायकों को मंत्रियों का संसदीय सचिव नियुक्त किया था. प्रशांत पटेल नाम के वकील ने विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किए जाने के खिलाफ शिकायत की थी. एक विधायक जरनैल सिंह ने पंजाब विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए दिल्ली विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था.
आयोग द्वारा अयोग्य ठहराये गए विधायकों में शरद कुमार (नरेला) आदर्श शास्त्री (द्वारका) प्रवीण कुमार (जंगपुरा) शिव चरण गोयल(मोती नगर) मदन लाल (कस्तूरबा नगर) संजीव झा(बुराड़ी) सरिता सिंह (रोहतास नगर) राजेश गुप्ता (वजीरपुर) नरेश यादव (महरौली) राजेश रिषी (जनकपुरी) अनिल कुमार वाजपेयी (गांधी नगर ) अवतार सिंह (कालका जी) सोमदत्त ( सदर बाजार) जरनैल सिंह (तिलकर नगर) विजेंदर गर्ग विजय (राजेंद्र नगर) कैलाश गहलोत(नजफगढ्) अल्का लांबा(चांदनी चौक) नितिन त्यागी(लक्ष्मी नगर) मनोज कुमार (कोंडली) और सुखवीर सिंह (मुडका) थे.

आप विधायकों पर अदालत का फैसला अच्छा संदेश : शत्रुघ्न
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों की बर्खास्तगी को खारिज करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को देश और लोकतंत्र के लिए अच्छा संदेश बताया. अदालत ने आज अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयोग ने ‘लाभ के पद’ मामले में आप विधायकों की बर्खास्तगी की सिफारिश राष्ट्रपति से करने से पहले विधायकों को उनकी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया. उसने आयोग से दोबारा सुनवाई का मौका देने की बात कही और तब तक के लिए विधायकों की विधानसभा सदस्यता बहाल कर दी है. अपनी ही पार्टी के खिलाफ बेबाक बयानी के लिए जाने जानेवाले सिन्हा ने आज यहाँ संसद परिसर में उच्च न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह आम आदमी पार्टी के लिए ही नहीं, देश और लोकतंत्र के लिए भी अच्छा संदेश है. इससे आप को बड़ी राहत मिली है.” भाजपा नेता ने कहा कि वह हर आदमी को महसूस हो रहा था कि बर्खास्त करने से पहले आप के विधायकों को उनकी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया. उन्होंने कहा, “मुझे भी लगता नहीं था कि सही हो रहा है.” सिन्हा ने कहा कि दूसरे राज्यों में भी कई विधायक लाभ के पदों पर रहे हैं और आप विधायकों की तुलना में लंबे समय तक रहे हैं. इसलिए, चुनाव आयोग की सिफारिश भेदभावपूर्ण थी.

चुनाव आयोग का टिप्प्णी से इनकार
चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य करार दिये जाने के आदेश को पलटने के दिल्ली उच्च न्यायालय निर्णय पर तत्काल कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. आयोग ने कहा है कि उसे अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रतिलिपि अभी नहीं मिली है और वह आदेश का अध्ययन करने के बाद ही कोई टिप्पणी करेगा. गौरतलब है कि आज उच्च न्यायालय ने आप के इन विधायकों की सदस्यता फिलहाल बहाल कर दी है और आयोग को कहा है कि वह सभी विधायकों की सुनवाई करने के बाद ही कोई निर्णय ले. न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की खंडपीठ ने विधायकों को अयोग्य ठहराये जाने की चुनाव आयोग की सिफारिशों को खारिज करते हुए निर्देश दिया कि आयोग उनकी याचिका पर फिर से सुनवाई करे. न्यायालय ने गत 28 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था. आयोग ने इसी वर्ष 19 जनवरी को संसदीय सचिव को लाभ का पद मानते हुए राष्ट्रपति से आप के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की थी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूर करते हुए विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी थी. दिल्ली विधानसभा के फरवरी 2015 में हुए चुनाव में आप को 70 में से 67 सीटें मिली थीं. श्री अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री बनने के बाद 21 विधायकों को मंत्रियों का संसदीय सचिव नियुक्त किया था. प्रशांत पटेल नाम के वकील ने विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किए जाने के खिलाफ शिकायत की थी. एक विधायक जरनैल सिंह ने पंजाब विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए दिल्ली विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था.

कोर्ट का फैसला जीत नहीं, इस्तीफा दें आप विधायक
कांग्रेस ने कहा है कि दिल्ली के विधायकों की सदस्ययता का दिल्ली उच्च न्यायालय का आज फैसलाा आम आदमी पार्टी (आप) विधायकों की जीत नहीं है और उन्हें तत्काल इस्तीफा देना चाहिए. पार्टी प्रवक्ता सुष्मिता देव तथा मणिपुर के पूर्व उप मुख्यमंत्री गैखंगम ने यहां पार्टी की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि आम आदमी पार्टी की तरह ही भारतीय जनता पार्टी की मणिपुर सरकार ने नियमों का उल्लंघन कर 12 विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किया है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में 20 विधायकों ने नियमों का उल्लंघन किया है और इसी तरह से मणिपुर में 12 विधायकों ने नियमों के खिलाफ काम किया है इसलिए दोनों राज्यों के इन विधायकों को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए. दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि मणिपुर में भाजपा सरकार लगातार नियमों का उल्लंघन कर रही है. दिल्ली की तरह वहां भी नियमों की परवाह किए बिना 12 विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किया गया है. इन 12 विधायकों में भाजपा के आठ, एनपीएफ के तीन तथा एक निर्दलीय विधायक शामिल है. उन्होंने कहा कि संसदीय सचिव लाभ के पद के दायरे में आता है इसलिए इस मामले में दोषी पाए गए आम अादमी पार्टी तथा भारतीय जनता पार्टी के विधायकों को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए. दोनों राज्यों में विधायकों के इस्तीफे के कारण रिक्त हुए विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव कराए जाने चाहिए. गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी के विधायकों को अयोग्य ठहराये जाने की चुनाव आयोग की सिफारिशों को खारिज करते हुए आज निर्देश दिया कि आयोग इनकी याचिका पर फिर से सुनवाई करे.

LEAVE YOUR COMMENT

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to Top