समय पर पहचान कर फेफड़ें कैंसर की मृत्यु दर में लाई जा सकती है कमी | Navabharat - Hindi News Website
Navabharat – Hindi News Website
No Comments 7 Views

समय पर पहचान कर फेफड़ें कैंसर की मृत्यु दर में लाई जा सकती है कमी

जयपुर. फेफड़े के कैंसर की समय पर पहचान कर इससे मरने वाले मरीजों की संख्या में कमी लाई जा सकती हैं. जयपुर में स्थित भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ़ नरेश जाखोटिया ने विश्व क्षय रोग दिवस केे अवसर पर आज बताया कि टीबी और फेफड़े के कैंसर के लक्षणों में समानता होने से फेफड़े के कैंसर की पहचान समय पर नहीं हो पाती है, इससे कई बार फेफड़े कैंसर रोग के उपचार की शुरूआत में देरी हो जाती है. रोग की सही पहचान नहीं होने के कारण रोगी को कैंसर मुक्त करना काफी मुश्किल हो जाता है. उन्होंने बताया कि फेफड़े के कैंसर के अधिकांश रोगी अपनी बीमारी की शुरूआती अवस्था को टीबी मानकर उसका उपचार करवा रहे होते हैं और रोग के फैलने के बाद कैंसर की पहचान होती है, तब तक रोगी के शरीर में कैंसर फैल चुका होता है. डा. जाखोटिया ने कहा कि फेफड़े के कैंसर की समय पर पहचान कर ली जाये तो इससे मरने वाले मरीजों की संख्या में कमी आयेगी. उन्होंने बताया कि कफ, लम्बे समय तक बुखार, सांस का फूलना जैसे लक्षण टीबी और फेफडे के कैंसर दोनों ही बीमारियों में होते है, ऐसे में लंबे समय तक रोगी के सही रोग की पहचान नहीं हो पाती है. उन्होंने बताया फेफड़े के कैंसर और टीबी दोनों की बीमारी में धूम्रपान सामान्य कारण है. उन्होंने बताया कि विश्वभर में एक साल में 16.10 लाख फेफड़े के कैंसर के मामले सामने आते है. पुरूषों में कैंसर से होने वाली मौतों में फेफड़े का कैंसर प्रथम स्थान पर है. फेफड़े के कैंसर का प्रमुख कारण धूम्रपान है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च के अनुसार धूम्रपान के कारण हुए कैंसर से वर्ष 2010 में देश में नौ लाख तीस हजार लोगों की मौत हुई थी. उन्होंने इस रोग की देर से पहचान का मुख्य कारण आमजन में जागरूकता की कमी को बताया. उन्होंने कहा कि अगर तेज बुखार, खांसी और सांस फूलने की स्थिति में अगर रोगी टीबी का उपचार ले रहा है और दो सप्ताह तक उसकी स्थिति में सुधार नहीं आता है तो पुन: जांच करानी चाहिए.

LEAVE YOUR COMMENT

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to Top