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गंगा की सफाई में योगदान देगी सीआरपीएफ :राजनाथ

नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) भी गंगा की सफाई में सहयोग करेगी और उसके लगभग डेढ हजार कर्मी वाराणसी, इलाहाबाद और पटना जैसे शहरों में पवित्र नदी की सफाई में योगदान देंगे. सिंह ने गुरूग्राम स्थित कादरपुर अकादमी में सीआरपीएफ के 75 वें स्थापना दिवस के मौके पर कहा कि नक्सलियों और आतंकवादियों से लड़ने के साथ साथ अब बल के जवान पवित्र गंगा की साफ-सफाई में भी योगदान देंगे और यह अच्छी बात है कि वे यह काम आज से ही शुरू कर रहे हैं. बल के महानिदेशक राजीव राय भटनागर ने भी कहा कि जवान आज से ही गंगा की सफाई के लिए अभियान चलायेंगे. गृह मंत्री ने कहा कि बल के अभियानों की वजह से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हमलों में कमी आयी है और माआेवादियों की गतिविधियों पर काफी हद तक अंकुश लगा है. उन्होंने कहा कि वाम उग्रवाद अब अंतिम चरण में है और इस दिशा में अभियान जारी रहेगा. भटनागर ने कहा कि जम्मू कश्मीर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बल के अभियानों में लगभग पौने दो सौ आतंकवादी तथा नक्सली मारे गये हैं. सिंह ने उत्कृष्ट तथा सराहनीय सेवा के लिए बल के जवानों तथा अधिकारियों को पदकों तथा प्रशस्ति पत्र से सम्मानित भी किया.

मादक पदार्थ बेचते पकड़े गये 332 विदेशी नागरिक
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि विदेशी नागरिकों द्वारा मादक पदार्थों की बिक्री देश के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आयी है और पिछले वर्ष इन मामलों में 332 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया. सिंह ने मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) के दो दिवसीय सम्मेलन में अपने समापन संबोधन में कहा कि पिछले वर्ष मादक पदार्थों की बिक्री के मामलों में 332 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया. ये अफ्रीका के रास्ते दक्षिण अमेरिका से कोकिन की तस्करी करते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस पर अंकुश लगाने के लिए पडोसी देशों सहित विभिन्न देशों के साथ 37 द्विपक्षीय समझौतों और करारों पर हस्ताक्षर किये हैं. पिछले चार सालों में आस्ट्रेलिया , सिंगापुर , मोजाम्बिक , थाइलैंड और नेपाल के साथ इस तरह के समझौते किये गये. उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष विभिन्न एजेन्सियों ने देश में 1991 किलो अफीम, 2189 किलो हेरोइन, 196792 किलो गांजा , 2657 किलो हशीश और 67 किलो कोकिन जब्त की. इसके साथ ही देश भर में अफीम तथा गांजे की कई सौ एकड खेती को भी ध्वस्त किया. उन्होंने कहा कि अफीम की खेती वाले दो बड़े क्षेत्रों पश्चिम में ‘गोल्डन क्रिसेंट ’ तथा पूर्व में ‘गोल्डन ट्रायेंगल’ के बीच होने के कारण भी भारत को इस समस्या से दो चार होना पड़ रहा है. मादक पदार्थों की तस्करी और देश में इनकी बिक्री हमारे समाज के लिए बड़ा खतरा है. इससे विभिन्न क्षेत्रों में शांति , स्वास्थ्य और स्थिरता को भी खतरा पैदा होता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए इसकी आपूर्ति तथा मांग दोनों पर अंकुश लगाया जाना जरूरी है. कुछ हिस्सों में अफीम तथा भांग की अवैध खेती को भी उन्होंने चिंता का विषय बताते हुए कहा कि इस पर रोक लगाये जाने की जरूरत है. सिंह ने कहा कि सरकार ने पिछले वर्ष ही सात नये पदार्थों को मादक पदार्थों की श्रेणी में शामिल किया है जिससे इनकी तस्करी पर रोक लगायी जा सके. मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो को इस तरह के अपराधों और उन्हें अंजाम देने वाले लोगों की जानकारी एकत्र करने के लिए एक साफ्टवेयर विकसित करने के उद्देश्य से धन मुहैया कराया गया है. सिंह ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित धन को अर्थव्यवस्था में आने से रोकने के लिए व्यापक वित्तीय जांच प्रणाली की जरूरत है. उन्होंने मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों का पता लगाने और उनके आकाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी जरूरत बतायी. उन्होंने कहा कि सरकार राज्यों को इस समस्या से निपटने के लिए दी जाने वाली राशि के आवंटन को बढाने पर विचार करेगी. मादक पदार्थों की समस्या से निपटने वाली केन्द्र तथा राज्यों की 50 से भी अधिक एजेन्सियों ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया. सम्मेलन में राज्यों की पुलिस, आबकारी विभाग, केन्द्रीय पुलिस बल, राजस्व खुफिया निदेशालय, केन्द्रीय मादक पदार्थ ब्यूरो, केन्द्रीय जांच ब्यूरो तथा अन्य एजेन्सियों के 110 से भी अधिक प्रतिनिधि भी शामिल हुए. सम्मेलन में ‘भारत में मादक पदार्थों की तस्करी का व्यापक परिप्रेक्ष्य’, ‘वित्तीय जांच पड़ताल’, ‘विदेशी और साइबर जांच’ जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गयी. चर्चा के दौरान विभिन्न एजेन्सियों ने प्रस्तुति दी तथा संयुक्त राष्ट्र और विदेशी एजेन्सियों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे.

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