Navabharat – Hindi News Website
No Comments 4 Views

विश्व में आज टीबी दिवस

संयुक्त राष्ट्र. दुनिया के सभी देशों ने संक्रामक बीमारी तपेदिक (टीबी) से लड़ने के लिए समन्वित प्रयासाें पर जोर दिया है ताकि 2030 तक इसे विश्व से मिटाया जा सके. डॉ राबर्ट कोच ने 24 मार्च 1882 को टीबी के कारक जीवाणु माइक्रोबैक्टीरिम ट्यूबरकुलोसिस की खोज की थी जिसके बाद इस बीमारी के निदान और उपचार में आसानी हो गयी थी. प्रत्येेक वर्ष लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक बनाने के लिए विश्व स्तर पर आज के दिन विश्व तपेदिक दिवस मनाया जाता है. पिछले कुछ दशकों में इस बीमारी के इलाज में काफी प्रगति हुई है लेकिन यह अभी भी विश्व के शीर्ष संक्रामक रोगों में शुमार है और प्रतिदिन 4500 लोगों की मौत हो रही है. टीबी के मरीज दो तीन महीनाें में ही अच्छे होने लगते हैं आैर इसी के चलते अपना इलाज बीच में ही छोड़ देते हैं. इसका इलाज सामान्यत: नौ महीने तक चलता है लेकिन बीच में दवाई बंद करने से दवा प्रतिरोधक टीबी हो जाती है. इसे एमडीआर टीबी भी कहा जाता है. इसके उपचार में दूसरी श्रेणी की दवाएं दी जाती हैं. इस वर्ष टीबी दिवस की थीम “टीबी मुक्त विश्व के लिए नेताओं की आवश्यकता” है और इसमें टीबी से लड़ने के लिए न केवल राजनीतिक स्तर बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य स्तर पर पर भी मिलकर काम करने की प्रतिबद्वता जताई गयी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2017 में एक करोड़ चार लाख लोग टीबी की चपेट में आए और 2016 में टीबी से 18 लाख लोगों की माैत हाे गयी थी. टीबी की बीमारी किसी को भी हो सकती है लेकिन कुपोषण के शिकार और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को इस बीमारी के हाेने के जोखिम ज्यादा हैं.

LEAVE YOUR COMMENT

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to Top