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शेयर बाजार में ढाई फीसदी से अधिक की गिरावट

मंबई. चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों के पटरी लौटने के आंकड़े आने के बावजूद वित्तीय घाटा बढ़ने की आशंका में हसोत्साहित निवेशकों द्वारा की गयी भारी बिकवाली से बीते सप्ताह घरेलू शेयर बाजार ढाई फीसदी से अधिक की गिरावट लेकर बंद हुये. बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स समीक्षाधीन अवधि में 846.30 अंक अर्थात 2.51 प्रतिशत गिरकर 33 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 32832.94 अंक पर आ गया. इसी तरह से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 267.90 अंक अर्थात 2.58 प्रतिशत टूटकर 10121.80 अंक पर रहा. पांच कारोबारी दिवस में से पांच दिन सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गयी. इससे पहले लगातार आठ दिनों तक शेयर बाजार में तेजी रही थी. विश्लेषकों का कहना है कि चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अक्टूबर तक वित्तीय घाटा के बजट अनुमान के 96 प्रतिशत पर पहुंचने से शेष पांच महीने में इसके लक्षित दायरे से बाहर निकलने के जोखिम को देखते हुये निवेशकों ने बिकवाली की है. यदि सरकार वित्तीय घाटा को लक्षित दायरे में रखने के उपाय करेगी तो इससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा और उससे विकास की गति धीमी पड़ सकती है. निवेशकों ने इसी जोखिम को ध्यान में रखते हुये जमकर मुनाफावसूली की है. वैसे भी शेयर बाजार रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया था तो कुछ करेक्शन की संभावना थी लेकिन एक सप्ताह में ढाई फीसदी से अधिक की गिरावट की उम्मीद नहीं की जा रही थी. उनका कहना है कि अगले सप्ताह बाजार में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है क्योंकि पूंजी बाजार जिस स्तर पर आ गया है उस पर लिवाली की पूरी संभावना है. इसके साथ ही अगले सप्ताह रिजर्व बैंक की मौद्रित नीति समिति की बैठक होने वाली जिसमें ब्याज दरों पर चर्चा की जायेगी. यह बैठक मंगलवार से शुरू होगी और बुधवार को दोपहर बाद समिति की बैठक का निर्णय जारी किया जायेगा. हालांकि अर्थशास्त्रियों ने ब्याज दरों में फिलहाल कमी की उम्मीद नहीं कर रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार द्वारा वस्तु एंव सेवा कर (जीएसटी) दर को तर्कसंगत बनाये जाने के बाद से उपभोक्ता मांग बढ़ने लगी है जिससे विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन में और तेजी से सुधार की उम्मीद है. इसके साथ ही दुपहिया वाहनों छोटे यात्री वाहनों की मांग में तेजी आने की संभावना दिख रही है. कुद मिलाकर अभी आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ब्याज दरों में कमी की उम्मीद नहीं की जा सकती है. उनका कहना है कि महंगाई बढ़ने का खतरा अभी भी बना हुआ है क्योंकि हाल के दिनों में प्यात और टमाटर के साथ ही कई आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेजी आयी है. रिजर्व बैंक महंगाई को चार फीसदी के दायरे में रखने की कोशिश कर रहा है और इसलिए अभी वह ब्याज दरों में कमी करने का जाेखिम नहीं उठाने वाला है. समीक्षाधीन अवधि में बीएसई का मिडकैप 177.05 अंक गिरकर 16757.27 अंक पर रहा. मझौली कंपनियों की तुलना में छोटी कंपनियों में कम बिकवाली हुयी जिससे स्मॉल कैप मात्र 7.07 अंक गिरकर 18017.48 अंक पर रहा. सप्ताह की शुरूआत बढ़त के साथ हुयी थी. सोमवार को बीएसई का सेंसेक्स 45.0 अंक बढ़कर 33724.44 अंक के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया. इसी तरह से एनएसई का निफ्टी 9.85 अंको की तेजी लेकर 10399.55 अंक पर रहा था. लगातार आठ सत्रों की तेजी के मद्देनजर मंगलवार को शेयर बाजार में मुनाफावसूली हुयी जिससे सेंसेक्स 105.85 अंक गिरकर 33618.59 अंक पर रहा. निफ्टी 29.30 अंक उतरकर 10370.25 अंक पर रहा. गुरूवार 30 नवंबर को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के आर्थिक आंकड़े आने थे जिसके मद्देनजर बुधवार को निवेशकों ने सतर्कता बरता जिससे सेंसेक्स 15.843 अंक गिरकर 33602.76 अंक पर और निफ्टी 8.95 अंक गिरकर 10361.30 अंक पर रहा. गुरूवार को जीडाटी के आंकड़ें के साथ ही कोर उद्योग का उत्पादन और ओपेक की महत्वपूर्ण बैठक भी हुयी है. इसी दौरान चालू वित्त वर्ष के सरकारी राजस्व के आंकड़े भी जारी किये गये जिसमें वित्तीय घाटा बजट अनुमान का 96 प्रतिशत पर पहुंच गया. इससे वित्तीय बढ़ने की आशंका बनी और निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी जिससे इस दिन बीएसई का सेंसेक्स 453.41 अंक गिरकर 33149.35 अंंक पर और निफ्टी 134.75 उतरकर 10226.55 अंक पर रहा. गुरूवार को बाजार बंद होने के बाद जीडीपी के आंकड़े थे लेकिन शुक्रवार को वह बाजार को गति देने में नाकाम रहा और बिकवाली का रूख कायम रहने से सेंसेक्स 316.41 अंक गिरकर 32832.94 अंक पर आ गया. निफ्टी 104.75 उतरकर 10121.80 अंक पर रहा.

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