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अयोध्या में छह दिसम्बर को 25वें वर्ष पर सुरक्षा के कड़े प्रबन्ध

अयोध्या. अयोध्या के विवादित ढांचा ध्वस्त होने की 25 वीं बरसी पर यहाँ दोनों समुदायों की ओर से शौर्य दिवस और काला दिवस मनाये जाने की घोषणा को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये हैं. पुलिस अधीक्षक (नगर) अनिल कुमार सिंह सिसौदिया ने आज यहाँ “यूनीवार्ता” को बताया कि छह दिसम्बर को हिन्दू और मुस्लिम संगठनों के शौर्य और काला दिवस मनाये जाने को देखते हुए अयोध्या में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये गये हैं. उन्होंने बताया कि विवादित श्रीरामजन्मभूमि की सुरक्षा कड़ी होने के साथ-साथ स्थानीय पुलिस बल के अलावा चार एडिशनल एसपी, दस डिप्टी एसपी, दस कम्पनी पैरा मिलेट्री फोर्स, दो कम्पनी रैपिड एक्शन फोर्स, एक कम्पनी आरएएफ, चार सौ आरक्षी, एक प्लाटून महिला कमांडो, एक सौ पचास कांस्टेबिल फोर्स लगाये गये हैं. इसके अलावा बम निरोधक दस्ते सहित विभिन्न जगहों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाये गये हैं. छह दिसम्बर को जिले की सीमा पर लगे बैरियर पर वाहन की सघन तलाशी करने के बाद ही प्रवेश दिया जायेगा. उन्होंने बताया कि छह दिसम्बर को अयोध्या में छोटे वाहनों के प्रवेश पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से रोक लगायी जा सकती है. हिन्दू और मुस्लिम के कार्यक्रमों के मद्देनजर यहाँ के असामाजिक तत्वों द्वारा कोई दुरुपयोग न हो इसके लिये निषेधाज्ञा लगायी गयी है. सिसौदिया ने बताया कि हिन्दू और मुस्लिम के परम्परागत कार्यक्रमों में कोई रोक नहीं लगायी गयी है अलबत्ता नये कार्यक्रम का आयोजन नहीं होने दिया जायेगा. जो भी कार्यक्रम होंगे वे मंदिर-मस्जिद के परिसर में ही आयोजित होंगे. सड़क पर सभा और जुलूस पर रोक लगा दी गयी है. उन्होंने बताया कि होटल, धर्मशाला पर ठहरे व्यक्तियों पर निगरानी रखी जा रही है. पूरी अयोध्या में सतर्कता बरतने के निर्देश दिये गये हैं. जिलाधिकारी डा0 अनिल कुमार पाठक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुभाष सिंह बघेल, अपर जिलाधिकारी नगर विन्ध्यवासिनी राय सहित विभिन्न अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बैठक आज हुई. इस बीच, विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि छह दिसम्बर को देश भर में विभिन्न स्थानों पर विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ता हिन्दू समाज से अपील करेंगे कि वह मठ-मंदिरों और घरों में पूजा-पाठ करके अयोध्या में विवादित श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण कराने का संकल्प लें जिससे मंदिर का निर्माण हो सके. शर्मा ने बताया कि विश्व हिन्दू परिषद के मुख्यालय कारसेवकपुरम् में शौर्य दिवस में स्वाभिमान संकल्प सभा का आयोजन किया गया है. इस स्वाभिमान संकल्प सभा में श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष मणिराम दास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास, जगद्गुरू पुरुषोत्तमाचार्य, महंत कौशल किशोर दास, श्रीरामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य एवं हिन्दू धाम के महंत और पूर्व सांसद डा. राम विलास दास वेदान्ती, महंत किशोरी शरण सहित विश्व हिन्दू परिषद के नेता व संत धर्माचार्य भाग लेंगे. दूसरी ओर, बाबरी एक्शन कमेटी ने घोषणा की है कि छह दिसम्बर को मुस्लिम संगठन के लोग अपनी-अपनी दुकानें बंद रखकर यौमे गम दिवस मनायेंगे तथा बाबरी मस्जिद के पुन: निर्माण के लिये दुआ करेंगे. इण्डियन यूनियन मुस्लिम लीग के प्रदेश अध्यक्ष डा. नजमुल हसन गनी ने बताया कि छह दिसम्बर को मुस्लिम लीग काला दिवस के रूप में मनायेगी. उसी दिन गाँधी पार्क में धरना-प्रदर्शन करके दुबारा बाबरी मस्जिद बनाने की मांग करेगी. इण्डियन मुस्लिम समाज के जिलाध्यक्ष हाजी मोहम्मद इस्माईल ने बताया कि छह दिसम्बर को ही बाबरी मस्जिद के दोबारा तामील के लिये तथा मुल्क में अमन-शांति के लिये अल्ला पाक से दुआयें मांगी जायेंगी. गौरतलब है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में छह दिसम्बर 1992 को विवादित बाबरी मस्जिद ढांचा गिराये जाने की पच्चीसवीं बरसी पर यहाँ दोनों समुदाय की ओर से किये जा रहे हैं. विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) जहाँ शौर्य दिवस मना रहा है वहीं मुस्लिम संगठन अपने-अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखकर यौमे गम दिवस मनायेगा एवं बाबरी मस्जिद के पुन: निर्माण के लिये दुआ करेगा.

अयोध्या मामले में कल से शुरू होगी सुनवाई
उच्चतम न्यायालय मंगलवार से अयोध्या में विवादित रामजन्मभूमि मामले की हर रोज सुनवाई करेगा. छह दिसम्बर 1992 को कारसेवकों ने विवादित ढांचे को ध्वस्त कर दिया था. विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) विवादित स्थान पर अगले साल अक्टूबर में राममंदिर का निर्माण शुरू करने की घोषणा कर चुका है. केन्द्र और उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकारों ने इस मसले पर मौन साध रखा है और इस संवदेनशील मुद्दे पर उन्हे उच्चतम न्यायालय के फैसले का इंतजार है. इससे पहले 30 दिसम्बर 2010 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस मामले में एेतिहासिक फैसला सुनाया था जिसके मुताबिक विवादित क्षेत्र की दो तिहाई जमीन हिन्दुओ और एक तिहाई मुस्लिमों को देने की बात कही गयी थी हालांकि इस फैसले से दोनो ही पक्ष सहमत नही थे जिसके बाद दोनो पक्षों ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. उच्च न्यायालय में यह मामला आठ साल चला था जिसकी शुरूआत वर्ष 2002 में हुयी थी.

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