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भारत की आयुर्वेद पद्धति पर टिकी दुनिया की आस

नयी दिल्ली. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आधुनिक जीवन शैली से होने वाले रोगों से निजात पाने में आयुर्वेद के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा है कि पूरी दुनिया आज भारत की इस चिकित्सा पद्धति पर आस लगाए हुए है. कोविंद आज यहां पंडित रामनारायण शर्मा राष्ट्रीय आयुर्वेद पुरस्कार 2008-2014 प्रदान करने के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन शैली के कारण होने वाले रोग पूरी दुनिया में तेजी से फैल रहे हैं. लोग इनसे निजात पाने के लिए भारत की आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की ओर बड़ी उम्मीद से देख रहे हैं. आयुर्वेद एेसी बीमारियों के उपचार और रोकथाम में काफी कारगर सिद्ध हो सकता है. उन्हाेंने कहा कि आयुर्वेद एक स्वस्थ जीवन के लिए सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी काफी मददगार हो सकता है. योग और आयुर्वेद एक तरह से शरीर और मन के बीच संतुलन और सामंजस्य स्थापित करने के सशक्त माध्यम हैं. ऐसे में देश की आने वाली पीढ़ियाें को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाने के लिए आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. कोविंद ने कहा कि भारत के वन,पर्वत और गांव औषधीय पौधों आैर जड़ी बूटियों की खान हैं. देश के वन क्षेत्रों में इनकी पांच हजार से ज्यादा प्रजातियां पायी जाती हैं ऐसे में 90 प्रतिशत आैषधीय पौधे इन वनों से ही उपलब्ध होते हैं. इसलिए इन बेशकीमती संसाधनाें का संरक्षण बेहद जरूरी है. लोगों को ऐसे पौंधाें आैर जड़ी बूटियों के संरक्षण के प्रति संवेदनशील होना चाहिए. पंडित रामनारायण शर्मा राष्ट्रीय आयुर्वेद पुरस्कार रामनारायण वैद्य आयुर्वेद अनुसंधान न्यास द्वारा 1982 में शुरु किया गया था. आयुर्वेद के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रति वर्ष यह पुरस्कार दिया जाता है. पुरस्कार के रूप में 2 लाख रुपए की नकद राशि, भगवान धनवंतरी की चांदी की एक प्रतिमा और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है.

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