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सिब्बल की दलील आश्चर्यजनक, चुनाव के समय मंदिरों के दौरे करने वाले राहुल रूख करें स्पष्ट

अहमदाबाद. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अयोध्या के रामजन्मभूमि विवाद में आॅल इंडिया सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल की ओर से इस मामले की सुनवाई को कथित तौर पर 2019 के आमचुनाव के बाद तक टालने की अदालत में दी गयी दलील को आश्चर्यजनक बताते हुए गुजरात मे मंदिरों के ताबड़तोर दौरे कर रहे राहुल गांधी से इस मामले में अपना आधिकारिक रूख स्पष्ट करने की मांग की. शाह ने आज शाम यहां पत्रकारों से कहा कि श्रीरामजन्मभूमि मामले की आज से देश की सर्वोच्च अदालत में सुनवाई शुरू हुई और जनता की भावना यह है कि फैसला जल्द से जल्द आये. भाजपा भी यह चाहती है कि वहां भव्य राममंदिर बने. पर कांग्रेस के नेता और सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील सिब्बल ने इसे मामले की सुनवाई जुलाई 2019 यानी अगले आम चुनाव के बाद तक टालने की आश्चर्यजनक दलील पेश कर दी. उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कांग्रेस को अलग प्रकार का रूख दिखाना होता है तो यह सिब्बल को आगे कर देती है चाहे यह टूजी घोटाला में जीरो लॉस थ्योरी हो या गुजरात में आरक्षण के मामले में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण संभव होने की राय देना हो. अब श्रीरामजन्मभूमि पर मंदिर बनने की राह में रोड़ा अटकाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील के तौर पर वह आगे आये हैं. ऐसा कर के क्या हासिल होगा. शाह ने कहा कि कांग्रेस तथा गुजरात में चुनाव के समय मंदिर मंदिर जाकर श्रद्धा जताने वाले राहुल गांधी को दोहरी नीति छोड़ कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उनकी पार्टी भी यही चाहती है कि इस मामले की सुनवाई टाल दी जाये. वह भी ऐसे समय जबकि जनता इस पर जल्द से जल्द फैसला चाहती है. सारे दस्तावेजों का अनुवाद हो चुका है और अदालत ने सुनवाई के लिए तीन जजों की पीठ तय कर दी है. भाजपा चाहती है कि जल्द से जल्द फैसला आये और वहां भव्य राममंदिर बने.

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