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किसानों को मिला 23 हजार करोड़ से ज्यादा ऋण

रायपुर. सहकारिता, संस्कृति और पर्यटन मंत्री दयालदास बघेल ने आज यहां बताया कि विगत 14 वर्षाें में उनके विभागों में कई उल्लेखनीय सफलताएं हासिल की गई है. सहकारिता विभाग के अंतर्गत यहां प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के सदस्य किसानों को खेती के लिए वर्ष 2003-04 से नवम्बर 2017 तक 23 हजार 135 करोड़ रूपए का ऋण दिया जा चुका है. उन्होंने न्यू सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि राज्य निर्माण के प्रथम तीन वर्षों में किसानों को इन समितियों से 13 से 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर अल्पकालीन ऋण मिलता था, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में सरकार ने लगातार कम करते हुए ब्याज मुक्त कर दिया. अब छत्तीसगढ़ के किसानों को वर्ष 2014-15 से खेती के लिए बिना ब्याज ऋण मिल रहा है. बघेल ने बताया कि इसके लिए विगत 14 वर्ष में 14 लाख 48 हजार 563 किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं. साथ ही उन्हें रू-पे-केसीसी कार्ड भी जारी किया जा रहा है. राज्य में सहकारी समितियों के माध्यम से वर्ष 2003-04 से 2016-17 तक छह करोड़ 96 लाख मीटरिक टन धान समर्थन मूल्य पर खरीदा गया. इसके लिए किसानों को 75 हजार 047 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया. इस वर्ष समितियों में धान बेचने के लिए 15 लाख 79 हजार किसानों ने अपना पंजीयन करवाया है. बघेल नेे बताया कि वर्ष 2006-07 तक किसानों को खेती के लिए अधिकतम एक लाख रूपए का अल्पकालीन ऋण मिलता था, जिसे डॉ. रमन सिंह की सरकार ने वर्ष 2007-08 में बढ़ाकर तीन लाख रूपए कर दिया और उसके अगले ही वर्ष 2008-09 से यह सुविधा अधिकतम पांच लाख रूपए कर दी गई.

ऋण लेने वाले किसानों की संख्या में भारी वृद्धि
बघेल ने बताया कि किसानों पर खेती की बढ़ती लागत का बोझ कम करने के लिए राज्य सरकार ने विगत 14 वर्ष में कृषि ऋणों पर ब्याज दरों में कमी और बाद में ब्याज मुक्त ऋण सुविधा का जो प्रावधान किया, उसके फलस्वरूप उनमें नये उत्साह का संचार हुआ और इन सुविधाओं का लाभ लेने वाले किसानों की संख्या में भी भारी वृद्धि हुई. सहकारिता मंत्री ने बताया कि वर्ष 2000-2001 में छत्तीसगढ़ में सहकारिता के क्षेत्र में ऋण लेने वाले किसानों की संख्या केवल तीन लाख 50 हजार और वितरित ऋणों की राशि लगभग 191 करोड़ रूपए थी. पिछले वित्तीय वर्ष 2016-17 में ऋण लेने वाले किसानों की संख्या बढ़कर नौ लाख 52 हजार तक पहुंच गई, जिन्हें तीन हजार 212 करोड़ 19 लाख रूपए का ऋण दिया गया. बघेल ने यह भी बताया कि वर्ष 2004-05 से 2016-17 तक राज्य सरकार ने कृषि ऋणों पर 727 करोड़ 75 लाख रूपए का ब्याज अनुदान दिया.

राज्य के शक्कर कारखानों में 4.62 लाख क्विंटल से ज्यादा उत्पादन
बघेल ने यह भी कहा कि राज्य सरकार किसानों को नगदी फसलों की खेती के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है. प्रदेश में सहकारिता के क्षेत्र में शक्कर कारखानों की संख्या एक से बढ़कर चार हो गई है. इन शक्कर कारखानों में पिछले वर्ष 2016-17 में चार लाख 62 हजार 576 क्विंटल शक्कर का उत्पादन हुआ. उन्होंने बताया कि राज्य के शक्कर कारखानों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली की राशन दुकानों को भी शक्कर दी जा रही है. इनमें भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना जिला-कबीरधाम की क्रशिंग क्षमता 3500 टन प्रतिदिन, दंतेश्वरी मैया सहकारी शक्कर कारखाना, कारकाभाट (जिला-बालोद) की क्षमता 1250 टन प्रतिदिन, मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाना ग्राम केरता (जिला-सूरजपुर) की क्रशिंग क्षमता 2500 टन प्रतिदिन और सरदार वल्लभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना पंडरिया (जिला-कबीरधाम) की क्रशिंग क्षमता भी 2500 टन प्रतिदिन है. बघेल ने बताया कि प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के जरिये समर्थन मूल्य नीति के तहत उपार्जन केन्द्रों में किसानों से धान खरीदने की सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था की गई है. उन्होंने यह भी बताया कि उपार्जित धान के सुरक्षित रख-रखाव के लिए पक्के चबूतरों का भी निर्माण करवाया जा रहा है. अब तक 588 समितियों में तीन हजार 370 चबूतरे बनवाए जा चुके हैं. छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपैक्स बैंक) की राशि से भी 1221 चबूतरों का निर्माण किया जा चुका है.

जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के विलय का प्रस्ताव
बघेल ने बताया कि राज्य के छह जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों – रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर, अम्बिकापुर और जगदलपुर का विलय छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपैक्स बैंक) में करने का प्रस्ताव है. इन बैंकों का विलय होने पर राज्य सहकारी बैंक की कुल राशि बढ़कर लगभग 12 हजार करोड़ रूपए तक पहुंच जाएगी. जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शेड्यूल बैंक का दर्जा नहीं दिए जाने के कारण उन्हें रिजर्व बैंक से सुविधाएं मिलने में कठिनाई होती थी, लेकिन इनका एकीकरण अथवा विलय होने के बाद सभी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक शेड्यूल बैंक में समाहित हो जाएंगे. इससे राज्य सहकारी बैंक के माध्यम से भारतीय रिजर्व बैंक से सुविधाएं आसानी मिलेगी.

रसोई गैस आपूर्ति के लिए 50 गोदामों का निर्माण पूर्ण
बघेल ने बताया कि राज्य में लगभग 35 लाख गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत खाद्य विभाग द्वारा महिलाओं के नाम पर निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन दिया जा रहा है. उन्हें मात्र 200 रूपए के पंजीयन शुल्क पर डबल बर्नर चूल्हा और पहला भरा हुआ सिलेण्डर भी मुफ्त दिया जा रहा है. इस योजना के तहत हितग्राही परिवारों को रसोई गैस सिलेण्डर आसानी से मिल सके, इसके लिए प्रथम चरण में राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्रों की 50 सहकारी समितियों का चयन कर वहां गैस गोदामों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है और समितियों के स्तर पर ही रसोई गैस सिलेण्डरों का वितरण किया जा रहा है. दूसरे चरण में 46 समितियों में रसोई गैस सिलेण्डरों के लिए गोदाम बनाने का लक्ष्य है.

सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा
संस्कृति विभाग की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए दयालदास बघेल ने बताया कि विगत 14 वर्षाें में विभाग ने राज्य में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और कलाकारों को प्रोत्साहित करने का भी उल्लेखनीय कार्य किया है. राजधानी रायपुर के महंत घासीदास संग्रालय परिसर स्थित मुक्ताकाशी मंच में नियमित रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. छत्तीसगढ़ व्यंजनों का आकर्षण बढ़ाने के लिए इस परिसर में गढ़कलेवा की स्थापना की गई है. राजिम कुंभ, भोरमदेव महोत्सव, बिलासा बाई केवटिन महोत्सव, रामगढ़ महोत्सव और चक्रधर समारोह जैसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी विभाग द्वारा संबंधित जिलों को आवंटन दिया गया है.

राज्य का पर्यटन मास्टर प्लान तैयार
बघेल ने बताया कि राज्य सरकार ने अपने घोषणा पत्र के अनुरूप छत्तीसगढ़ के चिन्हांकित दर्शनीय स्थलों का पर्यटन मास्टर प्लान तैयार कर लिया है. राज्य में पर्यटकों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है. घरेलू पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है. वर्ष 2003 में राज्य में केवल 97 पर्यटन स्थल चिन्हांकित किए गए थे, जिनकी संख्या वर्ष 2017 में बढ़कर 137 हो गई है. वर्ष 2008 की स्थिति में पर्यटकों की संख्या चार लाख 44 हजार के आसपास थी, जो वर्ष 2016 तक बढ़कर एक करोड़ 58 लाख 38 हजार तक पहुंच गई. बघेल ने बताया कि केन्द्र सरकार की योजना एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत वर्ष 2017 के लिए छत्तीसगढ़ के साथ गुजरात राज्य को भागीदार बनाया गया है. हमारे यहां के एक हजार वरिष्ठ नागरिकों को गुजरात के धार्मिक स्थलों की यात्रा करवायी गई है. दोनों राज्यों के पर्यटन विभागों द्वारा एक-दूसरे के यहां रोड शो भी आयोजित किए जा रहे हैं.

स्वदेश दर्शन योजना में आदिवासी पर्यटन सर्किट विकसित
पर्यटन मंत्री बघेल ने बताया कि स्वदेश दर्शन योजना के तहत छत्तीसगढ़ में आदिवासी पर्यटन सर्किट विकसित किया गया है, जिसमें जशपुर-कुनकुरी-मैनपाट-अम्बिकापुर होते हुए महेशपुर, रतनपुर, कुरदर, सरोधादादर, गंगरेल, नथिया नवागांव, कोण्डागांव, जगदलपुर, चित्रकोट और तीरथगढ़ को शामिल किया गया है.

रमन जन पर्यटन योजना में आकर्षक पैकेज टूर की व्यवस्था
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्म शताब्दी वर्ष पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 15 अक्टूबर 2016 से ‘रमन जन पर्यटन’ योजना की शुरूआत की है. इसमें प्रत्येक शनिवार और रविवार को ‘हमर राजधानी दर्शन’ के नाम से वातानुकूलित बस में सिर्फ 200 रूपए प्रति व्यक्ति की दर से पैकेज टूर का संचालन किया जा रहा है. इसमें लंच और शाम के चाय-नाश्ते की भी व्यवस्था रहती है. प्रत्येक सोमवार को राजधानी रायपुर से गिरौदपुरी और बारनवापारा अभ्यारण्य के लिए प्रति व्यक्ति 700 रूपए और प्रत्येक मंगलवार को चित्रकोट, तीरथगढ़ तथा बस्तर के पर्यटन स्थलों के लिए प्रति व्यक्ति 900 रूपए और प्रत्येक शुक्रवार को ताला-मल्हार-शिवरीनारायण और रतनपुर के लिए 500 रूपए प्रति व्यक्ति के मान से पैकेज टूर आयोजित किए जा रहे हैं. राजनांदगांव से चित्रकोट, तीरथगढ़ और दंतेवाड़ा के लिए 1500 रूपए प्रति व्यक्ति और डोंगरगढ़ से इस मार्ग पर पर्यटन के लिए प्रति व्यक्ति 1800 रूपए के पैकेज टूर की व्यवस्था की गई है. पर्यटन मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में राम वन गमन मार्ग को चिन्हांकित कर दण्डकारण्य सर्किट के रूप में विकसित करने के लिए प्रस्ताव केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय को भेजा है. इसमें शिवरीनारायण, राजिम, सिहावा (सप्तऋषि आश्रम) को शामिल किया गया है. बघेल के साथ पत्रकार वार्ता में उनके विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे.

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