डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर पर भी दौड़ेंगी हाईस्पीड ट्रेन | Navabharat - Hindi News Website
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डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर पर भी दौड़ेंगी हाईस्पीड ट्रेन

अलीगढ़. भारतीय रेलवे के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर (डीएफसी) पर भविष्य में 320 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक की गति वाली हाईस्पीड ट्रेनें दौड़ाना भी संभव होगा. माल परिवहन के लिए विशेष रूप से बनाये जा रहे इन द्रुतगामी कॉरीडोरों पर मालगाड़ियों के परिचालन के बाद खाली ट्रैक पर दिल्ली से कोलकाता और दिल्ली से मुंबई के बीच दिन में दो या तीन बुलेट ट्रेन सेवाएं शुरू करने का विचार है. उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में इब्राहिमपुर और दाऊद खां स्टेशनों के बीच फ्रेट कॉरीडोर के निर्माण को देखने आए राष्ट्रीय मीडिया के एक प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से बातचीत में अधिकारियों ने यह जानकारी दी. टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के मुख्य ट्रैक इंजीनियर आर एम शर्मा ने बताया कि डीएफसी के ट्रैक को बहुत बारीक नापजोख के साथ बिछाया जा रहा है और यह विश्व के आधुनिकतम रेलवे ट्रैक में से एक होगा जिस पर किसी यात्री गाड़ी को 320 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक गति पर अाराम से चलाया जा सकेगा. उल्लेखनीय है कि मुंबई अहमदाबाद के बीच प्रस्तावित हाईस्पीड ट्रेन की गति भी 320 किलोमीटर प्रतिघंटा बतायी गयी है. शर्मा ने बताया कि डीएफसी पर रेलवे ट्रैक बिछाने में विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप बेहद सटीकता से काम हो रहा है. ट्रैक की कंप्यूटर डिज़ायन एवं वास्तविक ट्रैक में महज़ दो से पांच मिलीमीटर से ज़्यादा अंतर संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि इससे देश में अगले 50 से 60 साल तक की ज़रूरतें पूरी हो जाएंगी. शर्मा के अनुसार डीएफसी पर लाँग हॉल मालगाड़ियां चलायीं जाएंगी जिनकी लंबाई करीब डेढ़ किलोमीटर और क्षमता 13000 टन होगी. ये गाड़ियां समय सारणी के हिसाब से 100 किलाेमीटर की गति से चलेंगी जिसकी औसत रफ्तार 75 से 80 किलाेमीटर प्रतिघंटा होगी जबकि इस समय देश में मालगाड़ियों की औसत गति 15 -20 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है. इतना ही नहीं पश्चिमी डीएफसी पर डबल स्टेक कंटेनर यानी एक कंटेनर के ऊपर दूसरा कंटेनर रखकर ले जाया जा सकेगा. रेल मंत्रालय के उपक्रम डीएफसी कारपोरेशन ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक अंशुमान शर्मा ने कहा कि पश्चिमी डीएफसी का निर्माण मुख्य रूप से कंटेनर परिवहन को और पूर्वी डीएफसी का निर्माण कोयला परिवहन को ध्यान में रख कर किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वर्तमान ट्रंक लाइन पर दिल्ली से सोननगर के बीच मालगाड़ियों का सर्वाधिक दबाव है. रोज़ाना दोनों दिशाओंं में करीब 60 मालगाड़ियां गुज़रतीं हैं. ये गाड़ियां करीब डेढ़ साल के भीतर पूर्वी डीएफसी पर आ जायेंगी. इससे मुख्य मार्ग पर यातायात का दबाव कम हो जाएगा जिससे उस पर गाड़ियों को तेज़गति से चलाना संभव होगा. डीएफसी पर रोज़ाना तकरीबन सौ गाड़ियों को आसानी से निकाला जा सकेगा.

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