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अब हिन्दी में मिलेंगे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट देश का पहला ऐसा हाईकोर्ट बन गया है जहां अब पक्षकारों को हिन्दी में फैसले की अधिकारिक प्रतिलिपि उपलब्ध कराई जाएगी। चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन ने इसकी घोषणा विधिक सेवा दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह में की। जस्टिस राधाकृष्णन ने कहा कि उच्च न्यायालय की अधिकारिक भाषा अंग्रेजी है, पर पक्षकारों को फैसले की जानकारी हिन्दी में मिलनी चाहिए, जिसे वे आम तौर पर समझते हैं। इसलिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अंग्रेजी में दिए जाने वाले फैसलों को हिन्दी में रूपांतरित करने की व्यवस्था कर दी गई है। रजिस्ट्रार जनरल गौतम चौरड़िया ने बताया कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट हिन्दी में फैसले की प्रतिलिपि प्रदान करने वाला देश का पहला हाईकोर्ट हो गया है। हिन्दी रूपान्तरण प्राप्त करने के लिए पक्षकार को शुल्क देना होगा, जो न्यूनतम होगा। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आज से 10 दिवसीय जनजागरण कार्यक्रम कनेक्टिंग टू सर्व कार्यक्रम चलाया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए जस्टिस राधाकृष्णन ने कहा कि विधि के छात्रों, अधिवक्ता और न्यायाधीशों को मिल-जुलकर विधिक सेवा उपलब्ध कराने के लिए काम करना चाहिए। आज तकनीकी संसाधनों का उपयोग करते हुए जनता को विधिक सहायता की जानकारी उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर ने इस मौके पर कहा कि समाज के कमजोर वर्ग को न्याय का समान अवसर देने के लिए सन् 1995 में 9 नवंबर को ही विधिक सेवा शुरू की गई। इसलिए जन्मदिन की तरह इस अवसर पर हम आयोजन करते हैं। हमें विधिक सेवा के लिए नए संकल्प लेने हैं। हमें अपने व्यवसाय के अलावा विधिक सेवा के लिए समय निकालना है। केवल अदालती मामलों में सहायता नहीं, बल्कि मानसिक अस्वस्थ, आदिवासी, महिला, बच्चों और अन्य असमर्थों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाना इसका मकसद है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष जिला न्यायाधीश एनडी तिगाला ने कहा कि आज का आयोजन पूर्व के आयोजनों से भिन्न है। इस बार 10 दिन का जन-जागरण अभियान शुरू किया गया है। विधिक सेवा दिवस के अवसर पर एनएसएस, सीएमडी कॉलेज इकाई, विधि के छात्रों और पैरालीगल वालेंटियर्स की ओर से एक रैली भी आज निकाली गई। चीफ जस्टिस और विधिक सेवा कार्यपालक अध्यक्ष ने इसे हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम में हाईकोर्ट जस्टिस प्रशान्त कुमार मिश्रा, जस्टिस एमएम श्रीवास्तव, जस्टिस गौतम भादुड़ी, जस्टिस पी. सैम कोशी, जस्टिस आरसीएस सामंत, जस्टिस शरद गुप्ता, जस्टिस आर पी शर्मा भी उपस्थित थे। इनके अलावा रजिस्ट्रार जनरल गौतम चौरड़िया, रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी, जिला न्यायालय के न्यायाधीश शैलेष शर्मा सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कलेक्टर पी. दयानंद, एस पी मयंक श्रीवास्तव, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष चंद्रशेखर बाजपेयी, अधिवक्तागण, विधि छात्र व कॉलेजों के छात्र भी रैली में शामिल हुए। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के उप-सचिव अभिषेक शर्मा ने आभार प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर लोगों को कानूनी सहायता पहुंचाने के लिए 18 नवंबर तक के लिए लीगल असिस्टेंस डेस्क की स्थापना भी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में की गई है। जहां पर कोई भी व्यक्ति आकर कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है। आज ही एक दृष्टिबाधित दिव्यांग सहायक शिक्षक तारकेश्वर सिंह वर्मा को निःशुल्क कानूनी सहायता दी गई।

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