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अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत ने लगाई ऊंची छलांग

नयी दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए 2017 एक के बाद एक कई उपलब्धियों वाला साल रहा. फरवरी में उसने एक साथ 104 उपग्रहों का प्रक्षेपण कर नया इतिहास रचा तो 24 साल में पहली बार पीएसएलवी का कोई मिशन विफल रहने से कुछ चिंताएँ भी उभरीं. साल की शुरुआत धमाकेदार रही.इसरो ने 15 फरवरी को एक साथ एक मिशन में और एक ही प्रक्षेपणयान से 104 उपग्रह छोड़कर विश्व कीर्तिमान बना दिया. इससे पहले उसने पिछले साल एक साथ 20 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया था.दुनिया के किसी अन्य देश ने अब तक एक साथ 100 उपग्रह अंतरिक्ष में नहीं भेजे हैं. इसमें कार्टोसैट-2 मुख्य उपग्रह था जबकि 101 विदेशी समेत कुल 103 छोटे एवं सूक्ष्म उपग्रह थे. इस मिशन में सबसे चुनौतीपूर्ण काम था सभी उपग्रहों को इस प्रकार उनकी कक्षा में स्थापित करना कि वे एक-दूसरे से न/न टकरायें. इसरो ने इस काम को बखूबी अंजाम देकर यह साबित कर दिया कि उपग्रह प्रक्षेपण में उसने महारत हासिल कर ली है. इस मिशन से वैश्विक स्तर पर वाणिज्यिक प्रक्षेपण में उसकी साख और मजबूत हुई है तथा भविष्य में इस मद से देश के विदेशी मुद्रा अर्जन में तेजी आयेगी. जून में इसरो ने जीएसएलवी प्रक्षेपण यान के अगले संस्करण जीएसएलवी एमके-3 डी-1 का सफल प्रक्षेपण किया. इस यान से 3,136 टन वजन वाले जीसैट-19 उपग्रह का प्रक्षेपण किया गया.इसरो द्वारा छोड़ा गया यह अब तक का सबसे भारी उपग्रह है. इस मिशन की सफलता के साथ ही भारत ने चार टन तक के वजन वाले उपग्रह को भूस्थैतिक कक्षा में स्थापित करने की दक्षता प्राप्त कर ली है. इससे पहले दो टन या इससे ज्यादा वजन के उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए हम विदेशों पर निर्भर थे. इसरो ने 23 जून को एक साथ 31 उपग्रहों का प्रक्षेपण कर एक बार फिर साबित कर दिया कि वह एक साथ कई उपग्रह छोड़ने में अपना कौशल तथा अनुभव बढ़ाता जा रहा है.भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी सफलता के जश्न में पड़ोसी देशों को भी शामिल करते हुये 05 मई को दक्षेस देशों का साझा उपग्रह साउथ एशिया सैटेलाइट जीसैट-9 लांच किया1 यह जीएसएलवी की लगातार चौथी सफल उड़ान रही. इसरो का कहना है कि अब जीएसएलवी भी लगातार सफल प्रक्षेपण करते हुये विश्वसनीय प्रक्षेपण यानों की श्रेणी में शामिल हो चुका है. लगातार 24 साल तक बिना किसी विफलता के अचूक प्रक्षेपण यान के रूप में स्वयं को स्थापित कर चुके पीएसएलवी के 41वें मिशन ने इसरो के विश्वास को इस साल बड़ा झटका दिया.पीएसएलवी सी-39 ने 31 अगस्त को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी1इस मिशन के जरिये नेविगेशन उपग्रह आईआरएनएसएस-1एच को उप-भू स्थैतिक कक्षा में स्थापित किया जाना था1 यह प्रक्षेपण विफल रहा. इसरो ने बताया कि शाम सात बजे प्रक्षेपण यान ने उड़ान भरी थी.प्रक्षेपण पूरी तरह योजना के अनुसार रही, लेकिन इसका हीट शील्ड प्रक्षेपण यान से अलग नहीं हो सका.इस कारण अंतरिक्ष में पहुँचकर उपग्रह हीट शील्ड के अंदर ही प्रक्षेपण यान से अलग हुआ. इसरो का कहना है कि वह हीट शील्ड के अलग नहीं होने के कारणों का विस्तृत विश्लेषण कर रहा है. इस विफलता के बाद इसरो ने साल के आखिरी चार महीने में किसी भी मिशन को अंजाम नहीं दिया है. पीएसएलवी की 20 सितंबर 1993 के बाद की यह पहली विफलता ह.इस साल इसरो ने कुल सात मिशन को अंजाम दिया जिनमें से छह सफल रह. इसके अलावा जीसैट-17 का प्रक्षेपण एरियन-5 वीए-238 से किया गया. साल के दौरान जीसैट-17 समेत इसरो ने उसके अपने आठ और 130 विदेशी उपग्रह छोड़े1 इसमें आईआरएनएसएस-1एच का प्रक्षेपण विफल रहा.आने वाले वर्ष में इसरो ने अपने प्रक्षेपणों की सालाना संख्या बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. साथ ही उसने चंद्रयान-2 की भी तैयारी की है जिसका प्रक्षेपण मार्च 2018 तक होने की उम्मीद है.

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