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आचार्य बोस के जीवन और कार्यों से सीख लें: मोदी

कोलकाता/नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोफेसर सत्येंद्र नाथ बोस की 125 वीं जयंती के मौके पर होने वाले कार्यक्रमों के शुरुआती समारोह की आज कोलकाता के एस एन बोस नेशनल सेंटर में वीडियो कांफ्रेंसिंग जरिए उद्घाटन किया. मोदी ने कहा,“ सत्येंद्र नाथ बोस की जयंती के 125 वें साल में हम एक वर्ष तक चलने वाले समारोह की शुरुआत कर रहे हैं. मुझे उनके कार्यों के बारे में बहुत कुछ पता चला जो अपने समय और समाज से कहीं आगे थे. प्रो एस.एन. बोस के जीवन और कार्यों से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं. वह स्वयं अपने गुरू थे. अनुसंधान के लिए औपचारिक शिक्षा तथा वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय से संपर्क में अभाव जैसी बाधाओं के बावजूद उन्होंने सफलता हासिल की.” उन्होंने कहा कि आचार्य ने परिमाण सांख्यिकीय और आधुनिक परमाणु सिद्धांत की नींव रखी जिसे आइंस्टीन के जीवनी लेखक अब्राहम पेस ने अपने काम के लिए क्रांतिकारी दस्तावेज माना. प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रो आचार्य ने विभिन्न भाषाओं में विज्ञान पढ़ाने के लिए छात्रों को प्रेरित किया. उन्होंने कहा, “ विशिष्ट वैज्ञानिक और छात्र, आप सभी ने अध्ययन किया है और संभवत: परिमाण यांत्रिकी के भी विशेषज्ञ हैं. मैंने इसकी पढ़ाई नहीं की है लेकिन मैं समझता हूं कि भौतिकी में ऐसे कई पाठ हैं जो हमें रोजमर्रा की जिंदगी के बारे में सिखा सकते हैं.” उन्होंने कहा, “हमारी वास्तविक क्षमता तक पहुंचने तथा भारतीय विज्ञान को सही रास्ते पर ले जाने के लिए हमें क्वांटम के कण की तरह होना चाहिए जो अपनी कैद से निकल भागता है. वर्तमान समय में यह अति आवश्यक है क्योंकि विज्ञान काफी बहु-अनुशासनात्मक होता है तथा इसमें बहुत प्रयासों की आवश्यकता होती है. मोदी ने कहा, “मैं अधिक से अधिक भौतिक तथा अनुसंधान ढांचे की आवश्यकता के बारे में बात कर रहा हूं जो महंगा है और जिसका समय काल तेजी से घट रहा है.” उन्होंने कहा, “ हमारा विज्ञान विभाग अब बहुद्देश्यीय दृष्टिकोण से काम कर रहा है. वैज्ञानिक संरचनाओं को साझा करने के लिए एक पोर्टल विकसित किया जा रहा है जो पारदर्शी, कुशल ट्रेनिंग तथा संसाधनों को साझा करने में मददगार साबित होगा.” उन्होंने कहा, “ इस प्रयास का सफलता इस बात पर निर्भर करेगा कि हम सभी संस्थाओं और प्रयोगशालाओं को किस हद तक इस रणनीति के तहत ला पाते हैं. इस काम में सभी लोगों को दिल से समर्थन करने की जरूरत है. तंत्र को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश के दूरस्थ कोने के वैज्ञानिक की पहुंच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली या वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) देहरादून की प्रयोगशाला तक सहज हो.”

प्रधानमंत्री की वेबसाइट 13 भाषाओं में
प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट ‘पीएमइंडिया’ के आज से असमी और मणिपुरी भाषा में शुरू होने के साथ ही यह 13 भाषाओं में उपलब्ध हो गयी है. इसके साथ ही पीएमइंडिया वेबसाइट हिंदी और अंग्रेजी के अतिरिक्त अब 13 क्षेत्रीय भाषाओं असमी, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल, और तेलुगु में उपलब्ध है.

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