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मानवता के हित में हो हर क्षण का सदुपयोग

सारनाथ (वाराणसी). सद्भाव एवं सदाचार को कुशल समाज तथा देश की कुंजी करार देते हुए तिब्बत के सर्वोच्य आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा तेनज़िन ग्यात्सो ने समय के हर क्षण का सदुपयोग अपने और मानवता के हित में करने की वकालत की है. भगवान बुद्घ की तपोभूमि सारनाथ में आज एक समारोह को संबोधित करते हुए सद्भाव एवं सदाचार को कुशल समाज तथा देश की कुंजी बताते हुए कहा, “ हमारा सद्भाव और सदाचार न केवल हमें लाभ पहुंचाते हैं, बल्कि इसका प्रभाव हमारे परिवार, समाज, और देश पर भी पड़ता है. एक कुशल समाज और देश की रचना केवल इसी तरह संभव है.” चौदहवें दलाई लामा केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह में सैंकड़ों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, कर्मचारियों और देश-विदेश से आये पुरातन छात्रों को संबोधित कर रहे थे . उन्होंने समय और मानवता के महत्व को समझाते हुए उसके प्रति समाज में जागरूकता लाने के प्रयासों को समझाने का प्रयास किया. लामा तिब्बती संस्थान की स्थापना की पिछले 50 वर्षों के लंबी यात्रा को सफल एवं ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि नव वर्ष 2018 का महत्व हम सभी को समझना चाहिए. लामा ने कहा कि समय सतत परिवर्तनशील है एवं प्रत्येक काल की समस्याएं भी सर्वदा परिवर्तनशील एवं नवीन है और इनका समाधान भी नये तरीके एवं नवीन प्रयासों से ही निकल पाएंगे. नव वर्ष के अवसर पर विचार करना चाहिए कि क्या हमारा बीता हुआ वर्ष संतोषजनक रहा और यदि नहीं, तो हमें अपने भीतर सुधार करना चाहिए. वर्ष के स्वतंत्र अस्तित्व को अस्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, “ वर्ष महीनों का, महीनें हफ्तों, हफ्ते दिनों, दिनों घंटों और घंटे मिनटों का संयोजन हैं. यानी वर्ष का अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है” इस याथार्थ को समझते हुए हमें अपने मस्तिष्क को सतत क्रियाशील रखना चाहिए, जिससे सत्य के विभिन्न पहलुओं का ज्ञान हो और प्रत्येक क्षण के महत्व को नये तरीके से अपने तथा मानव के हित में सदुपयोग किया जा सके. समारोह को तिब्बती प्रशासन के प्रमुख डॉ0 लोबसंग सेंग्ये ने तिब्बती संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में संस्थान की उपलब्धियों को महत्पूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि इस संस्थान के पास नालंदा की ज्ञान परंपरा को पुर्नस्थापित कर विश्वभर में बौद्ध धर्म के मूल संदेशों के समुचित प्रसार करने की क्षमता है. उन्होंने कहा कि इन बातों को ध्यान में रखते हुए इस संस्थान को अगले पांच तथा पचास वर्षों की योजना पर विचार करना चाहिए.

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