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उच्च शिक्षा में दाखिला दर बढ़कर हुई 25.2 फीसदी

नयी दिल्ली. उच्च शिक्षा में पिछले साढ़े तीन साल में करीब 35 लाख छात्रों का दाखिला हुआ है और दाखिला दर में सवा दो प्रतिशत की वृद्धि हुई है तथा यह अब 23 प्रतिशत से बढ़कर 25.2 प्रतिशत हो गयी है. यह जानकारी मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने वर्ष 2016-17 का अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण की रिपोर्ट आज यहाँ जारी करते हुए दी. उन्होंने बताया कि देश में उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़कर 864 हो गयी है जिनमें केन्द्रीय विश्विद्यालय, आईआईटी, एनआईटी आदि भी शामिल हैं और कॉलेजों की संख्या बढ़कर 51 हज़ार सात सौ हो गयी है. उच्च शिक्षा में तीन साल में लड़कियों के दाखिले में भी दो प्रतिशत की वृद्धि हुई है. लड़कों और लड़कियों की संख्या का अनुपात 100:94 हो गया है. जावड़ेकर ने यह भी बताया कि आईआईटी में अभी लड़कियों की संख्या केवल नौ प्रतिशत है जबकि एनआईटी में 12 प्रतिशत है. उन्होंने कहा कि हम लड़कियों को मनपसंद कोर्स तथा आईआईटी देकर और एक कोटा बनाकर उनकी संख्या बीस प्रतिशत करना चाहते हैं. जावड़ेकर ने यह भी बताया कि देश में उच्च शिक्षा के शिक्षकों की संख्या साढ़े पंद्रह लाख है जिनमें से साढे बारह लाख शिक्षकों को आधार से जोड़ दिया गया है यानी 85.1 प्रतिशत शिक्षक जुड़ गए हैं और इनमें से करीब अस्सी हज़ार ऐसे शिक्षकों का पता चला है जो दो-तीन कालेजों में पढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इसकी जाँच शुरू कर दी गयी है और अगर इनमें किसी तरह के फर्जीवाड़े का पता चलता है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने कहा कि यह सर्वेक्षण उच्च शिक्षा में तरक्की के मुकाम को बताता है और इस से उच्च शिक्षा की सही जानकारी मिलेगी और सही जानकारी से सही योजना बनेगी और फिर सही अमल भी होगा. उन्होंने आशा व्यक्त की कि 2022 तक उच्च शिक्षा में दाखिला दर 30 करने का लक्ष्य हासिल हो जायेगा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का न्यू इंडिया बनाने का सपना पूरा होगा. इस तरह हम विकसित देशों की श्रेणी में आ जायेंगे. एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने यह भी कहा कि हमें दाखिला दर की गति बढ़नी है और इसे 50 प्रतिशत करना है. उन्होंने उच्च शिक्षा में क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने की भी बात कही. मानव संसाधन विकास मंत्री ने बताया कि पुड्डुचेरी शिक्षण संस्थाओं के मामले में देश में शीर्ष पर है. वहां एक लाख की आबादी पर 70 संस्थान हैं जबकि बिहार, झारखण्ड में 10 से भी कम हैं. हमें क्षेत्रीय असंतुलन को भी दूर करना है. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में विदेशी छात्रों की संख्या में भी वृद्धि हुई है और 56 देशों के सात सौ विदेशी शिक्षकों ने भारत के कालेजों में लेक्चर दिए. इस तरह उच्च शिक्षा में गुणवत्ता को बढ़ाया गया.

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