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देश में 2016 में कैंसर के 39 लाख मामले

तिरूवनंतपुरम. देश और केरल में कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर जहां चिकित्सक बैचेन हैं वहीं तंबाकू उत्पादों पर 85 प्रतिशत ग्राफिक चेतावनी संंबंधी कानून को अवैध करार देने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले से सकते में भी हैं कि इससे कैंसर जागरूकता अभियान पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. विभिन्न शोध अध्ययनों में साबित हो गया है कि तंबाकू और इससे बने उत्पादों का सेवन कैंसर का एक बहुत बड़ा कारण हैं आैर युवा पाढ़ी को इसके खतरे के प्रति जागरूक करने की अावश्यकता हैं कि दोस्तों के बीच सिगरेट या बीड़ी का पहला कश जीवन भर की एक ऐसी आदत बन जाता है जिसे छुड़ाना मुश्किल बन जाता है. भारतीय चिकित्सा शोध परिषद(आईसीएमआर) के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के अनुसार देश में वर्ष 2016 में कैंसर के 39 लाख मामले देखे गए और इनमें से केेरल में 1,15,511 मामलाें का सामने आना चिंता का विषय है क्योंकि केरल देश का सर्वाधिक साक्षर राज्य है. क्षेत्रीय कैंसर केन्द्र के निदेशक डा़ पाल सेबेस्टियन के मुताबिक देश तथा केरल में कैंसर के बढ़ते मामले चिंता का विषय हैं और इस पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है तथा लोगों ,खासकर युवा वर्ग को भी जागरूक बनाया जाना जरूरी है. उन्होंने कर्नाटक उच्च न्यायालय के पिछले माह दिए गए फैसले पर चिंता व्यक्त की है जिसमें न्यायालय ने सिगरेट ,बीडी और अन्य तंबाकू उत्पादों के पैकेट के 85 प्रतिशत हिस्से पर चेतावनी संबंधी तस्वीरों के केन्द्र के 2014 के कानून को अवैध ठहराया है. इससे पहले के कानून में इन उत्पादों के 40 प्रतिशत हिस्से पर इस तरह की चेतावनी युक्त तस्वीरें हाेती थी. उन्होंने कहा“ इन उत्पादों के 85 प्रतिशत हिस्से पर चेतावनी युक्त तस्वीरों के काफी अच्छे नतीजे सामने आ रहे थे और इससे युवाओं, प्रवासी मजदूरों तथा अशिक्षित वर्ग के लोगों को इन खतरों के प्रति आगाह किया जा सकता था लेकिन अब इस दिशा में कोई भी पश्चगामी कदम तंबाकू जनित बीमरियों के खिलाफ सरकार की लडाई पर निश्चित रूप से प्रतिकूल असर डालेगा.’’

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