परमात्मा की एकता का साक्षात्कार : योग
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- Friday, 26 April 2013 23:36
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योग शब्द संस्कृत धातु ‘युज्’ से निष्पन्न हुआ है जिसका सामान्य अर्थ है- मिलना, जुड़ना, जोड़ना. व्यापक दृष्टि से यह आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिससे योगी जीवात्मा और परमात्मा की एकता का साक्षात्कार करता है. यह ईश्वर से मिलन की ओर बढ़ाया कदम है. स्वामी विवेकानंद के अनुसार ‘अध्यात्म मनुष्य के अंदर की चेतना का अनावरण करता है.’ योग इसमें सहायक है. यह अध्यात्म- प्रक्रिया पूर्णत: वैश्विक, धर्म निरपेक्ष है. किसी भी आस्था का विरोध नहीं है. योग तो जीवन को उन्नत, सशक्त बनाने की क्रिया है- शरीर, मन और आत्मा का सामंजस्य पूर्ण विकास है. योग आत्म संस्कृति की पूर्ण व्यावहारिक पद्धति है जिसमें निष्ठापूर्व आत्मसंयम, आत्मानुशासन और आत्मबल पुष्टि पाते...
भाग्य, आय और व्यवसाय
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- Friday, 01 February 2013 23:49
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आय, व्यवसाय और भाग्य स्थान के ग्रहों में परस्पर सामंजस्य स्थापित कर आप अपने जीवन में व्यवसायिक उन्नति कर सकते है. यदि नौकरी और व्यवसाय सम्बंधी कोई बाधा भी हो तो उपायों के द्वारा उन्हें ठीक किया जा सकता है. राशि से सम्बंधित उपाय करें और आय में वृद्धि कर सफल हों. किसी की आय के सम्बन्ध में चर्चा करते हैं, तो उसके व्यवसाय की प्रकृति की ओर भी हमारा...




