•  
  •  
  •  

Mon05202013

Last update12:46:09 PM

ब्रेकिंग न्यूज़
Back मुख्य पृष्ठ रिश्ते नाते दोहरे मापदंड महिलाओं के लिए क्यों?

दोहरे मापदंड महिलाओं के लिए क्यों?

User Rating:  / 0

हमारे समाज में स्त्री को लेकर कुछ ऐसे पूर्वाग्रह है.जिसे सोज कर लगता है कि वास्तव में हमारे समाज की सोंच कहां जा कर अटक गई है.एक ओर हम स्त्री शिक्षा और समान अधिकार की बात करते हैं.तो दूसरी तरफ हम उसी स्त्री को भला बुरा कहने पर भी पीछे नही हटते ऐसा क्यों हैं.हम उन्हे एक ओर देवी की तरह पूजते है.और दूसरी तरफ उसी देवी को नींचा दिखाने में कोई कसर नही छोड़ते.यह बात हमें सोचने में मजबूर करती है.आखिर ऐसा क्यों होता है. यह युगों युगों से चला आ रहा है.स्त्रियों के साथ होने वाले अत्याचारों का एक प्रमुख कारण है, उन पर थोपे गये दोगले नैतिक- मानदंड.एक ऐसी स्त्री,जो पुरुष द्वारा त्यागी गयी हो, विधवा होने के कारण एकाकी जीवन व्यतीत कर रही हो अथवा दहेज़ के अभाव में कुंवारी रह गयी हो नित नई अग्नि- परीक्षा से गुजरती है.जबकि अकेले रहने वाले पुरुष के चरित्र पर, कोई उंगली नहीं उठाता. तभी तो ये औरतें, व्यभिचारियों के निशाने पर रहती हैं. नारी के यौन-शोषण में, वजर्नाओं की मुख्य भूमिका है.छेड़खानी का विरोध करने वाली स्त्री को चरित्रहीन कहा जाता है.इसके चलते, दुराचारियों के हौसले बुलंद होते हैं.नारी द्वारा लगाये गये, दुर्व्यवहार के आरोप को, वृहद दृष्टिकोण से तौलने- परखने का प्रयास किया जाना चाहिए.स्त्री के प्रति संकुचित सोच, उसे कमजोर बनाती है और शोषण के कुचक्र में झोंक देती है.विश्वास करना कठिन है पर ऐसा होता है कि जिस औरत ने आवाज उठाई उसके चरित्र पर पहले शक किया जाता है. आज जो लोग दिल्ली गैग रेप में दामिनी का साथ दे रहे हैं. यदि हर स्त्री को इसी प्रकार लोगों का नैतिक समर्थन मिलता रहे तो अपराधी अवश्य डरेंगे.हमारा सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास कुछ ऐसा रहा है कि किसी न किसी रूप में नारी का दमन हुआ है.लम्बे विदेशी शासन के दौरान, आक्रान्ताओं की कुदृष्टि से बचाने के लिए, नारी को घर की चारदीवारी में कैद कर दिया गया.पर्दा प्रथा लागू हो गयी.बाल-विवाह भी चलन में आया. परन्तु इस सबसे, नारी का अस्तित्व नगण्य होने लगा.शिक्षा के मूलभूत अधिकार को खोकर, वह अपने पतिगृह के लिए नौकरानी और पति के लिए भोग्या एवं बच्चे पैदा करने की मशीन बनकर रह गयी.लेकिन समय बदला महिलाओं ने अपनी योग्यता साबित कर दी और लोगो की दोहरी मानसिकता को अपने ऊपर से उखाड़ फेंका ऐसी तभी संभव है.जब एक महिला दूसरी महिला को खुले मन से स्वीकारेगी.
दोहरी मानसिकता के चलते नारी, शैशव में पिता, युवावस्था में पति और वृद्धावस्था में बेटे के दुर्व्यवहार का शिकार होती रही.क्या घर से बाहर कदम न रखने पर, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सकी? निकट सम्बन्धियों, ससुर, जेठ आदि के द्वारा उसकी अस्मत पर हमले होते रहे. सभी पुरुष एक से नहीं होते. शिक्षित माता के सान्निद्य में पला- बढ़ा पुरुष, जिसने अपनी माता से भावनात्मक सुरक्षा और संस्कार पाए हों  नितांत विपरीत सोच रखता है. समय के साथ नारी की शक्ति बढ़ी, वह शिक्षित हुई.उस पर भी, वह पुरुष के समकक्ष न बन सकी.पढ़ी लिखी कामकाजी औरत को, घर और बाहर की दोहरी जिम्मेदारी, संभालनी पड़ती है.अपनी महिला सहकर्मी को आगे निकलते देख, कुछ पुरुष ईर्ष्यावश; उस पर बॉस से अनैतिक सम्बन्ध रखने का, आरोप तक लगा देते हैं. नारी की विडम्बना यह है कि यदि वह घर के बाहर, वजूद तलाशे- तो अपने परिवार और बच्चों की उपेक्षा से, उसे आत्मग्लानि होती है. लेकिन यदि वह परिवार के लिए अपने हितों को त्याग कर, घर में बैठी रहे- तो भी उसके त्याग को, सही तौर पर, कोई समझ नहीं पाता. एक गृहणी अपनी छोटी- छोटी जरूरतों के लिए, पति पर निर्भर करती है और इस कारण समय समय पर, उसकी उपेक्षा और तिरस्कार को भी झेलती है. हमारे समाज में स्त्री पर पाबंदियाँ लगाना और उसके पंख कतरना एक सहज प्रवृत्ति है. जब चाहे उसे रौंद देना भी, इस घृणित मानसिकता का ही हिस्सा है. मेरा दावा है कि जो लड़का अपने परिवार में, पिता द्वारा, माँ/ बहनों का सम्मान होते हुए देखता हो. जिसने बालपन से माँ, बहनों का स्नेह पाया हो; शिक्षित, शक्तिरूपा माता द्वारा संस्कार और मार्गदर्शन पाया हो- वह कभी व्यभिचारी हो ही नहीं सकता.और ना ही महिलाओं के ऊपर अत्याचार करेगा.

अंको का मायाजाल

four five six
seven eight nine
अंकों में छुपा आपका भविष्य

आज का पंचांग

panchang
आज का विस्तृत पंचांग

जिनका जन्मदिन है

birthdayimage
आपका आने वाला साल कैसा रहेगा

शुभ-अशुभ

shubhashubh
आज के शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

आज का राशिफल

Mesh Vrishabh
Kark Singh Kanya
Tula Vrishchik Dhanu
Makar Kumbh Meen
आज का दिन आपके लिए कैसा है?