खरीददारी में रखें समझदारी
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- Monday, 01 April 2013 01:00
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अक्सर हम बाजार से वस्तुओं की खरीददारी करते समय ठगे जाते हैं या बेवकूफ बन जाते हैं, जिसका बाद में हमें पछतावा होता है.
अत: खरीददारी करते समय हम निम्न बातों को अपना लें तो फिर हमें पछताने का मौका नहीं पड़ेगा
नियोजन : सर्वप्रथम आप नियोजन पर ध्यान दें. अनिवार्य आवश्यकताओं को प्रथम तत्पश्चात आरामदायक और अंत में विलासिता को...
अत: खरीददारी करते समय हम निम्न बातों को अपना लें तो फिर हमें पछताने का मौका नहीं पड़ेगा
नियोजन : सर्वप्रथम आप नियोजन पर ध्यान दें. अनिवार्य आवश्यकताओं को प्रथम तत्पश्चात आरामदायक और अंत में विलासिता को...
किराए की कोख और मातृत्व सुख
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- Monday, 01 April 2013 00:56
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हमारे देश में हर साल करीब 30-35 लाख महिलाएं शादी के बंधन में बंधती हैं, जिसमें से 8-10 लाख महिलाएं ताउम्र निसंतान होने का दुख झेलती हैं. वहीं यहां अनचाहे गर्भ को ढोने वाली माताओं की कोई कमी नहीं है जिसका नतीजा है अनचाहे बच्चों की फौज. पर अपनी वंश बेल चलाने के लिए दंपत्ति आज भी किसी गैर का बच्चा गोद लेने से कतराते हैं. खून का रिश्ता होना बहुत जरूरी...
मलाई: ब्यूटी की भरोसेमंद साथी
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- Monday, 11 March 2013 00:49
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यह जरूरी नहीं कि सर्दी में ही होठों पर पपड़ी और चेहरे पर खुश्की आती है. गमिर्यों में भी पानी की कमी से होठों में रूखापन आ जाता है. बाजार की नित-नई क्रीमें तो आप हमेशा ही ट्राय करती आई हैं, लेकिन कभी घर में हमेशा उपलब्ध रहने वाली उपयोगी क्रीम यानी मलाई पर भी नजर डाल लें. मलाई को कुछ इस तरह आजमाकर देखें-
एक चम्मच मलाई में नींबू का रस मिलाकर रोज...
स्त्री सौन्दर्य को सस्ता ना बनाएँ
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- Thursday, 14 March 2013 00:58
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विज्ञापनों में नारी को जिस वीभत्स रूप में दिखाया जा रहा है उसे देखकर लगता है कि पिछले एक ही दशक में नारी ने अत्यधिक प्रगति कर ली है.शोषण भी ऐसे मीठे जहर की तरह कि जिस पर हो रहा है वह उसके दर्द, वेदना व चुभन को अनुभव करने की संवेदनाएँ, शर्म, लिहाज सब कुछ खो चुकी है. घरों में, ग्रामीण क्षेत्रों में या महानगरों में जहाँ नारी परिवारजनों, पति या ससुराल...
विकास चाहिए तो दें दादा-दादी का साथ
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- Sunday, 24 February 2013 00:51
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बदलती जीवन शैली और व्यवसायिक परिस्थितियों ने व्यक्ति को अपना घर-परिवार, अपने माता-पिता से दूर जीवन व्यतीत करने के लिए विवश कर दिया है. आय के बेहतर अवसरों की तलाश और आर्थिक स्थिति सशक्त बनाने के लिए व्यक्ति जब अपने अभिभावकों से अलग दूसरे शहरों में रहने लगता है, तो ऐसे में वह वहीं अपना परिवार बसा लेता है. परिणामस्वरूप आधुनिक परिप्रेक्ष्य में एकल...

रिश्ते नाते



